भ्रूण हत्या मामले में दें दो माह में रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने संबंधित अदालतों को निर्देश दिए हैं कि पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत भ्रूण परीक्षण से संबंधित मुकदमों में दो माह में निर्णय करें। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि आरोप तय होने के स्तर पर लंबित मुकदमों में आरोप तय कराए और आरोपियों को वारंटों की तामील कराए। अदालत ने सोनोग्राफी मशीनों में साइलेंट ऑब्जर्वर नहीं लगाने और विवाह पंजीयन के समय उपहारों की सूची संलग्न नहीं करने पर भी सरकार से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई 21 मई को होगी। मुख्य न्यायाधीश अरुण मिश्रा व न्यायाधीश एन.के. जैन की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह अंतरिम आदेश एडवोकेट एस.के. गुप्ता की याचिका पर दिए। प्रार्थी द्वारा अदालत में पेश प्रार्थना पत्र में कहा कि आईटी कंपनियों ने साइलेंट ऑब्जर्वर नाम का एक सॉफ्टवेयर बनाया है, जिससे प्रत्येक सोनोग्राफी टेस्ट का पता चल सकता है। सोनोग्राफी सेंटर्स में इसे लगाने के बाद पीसीपीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सकेगी। उन्होंने एक अन्य प्रार्थना-पत्र में अनिवार्य विवाह पंजीयन नियम, 2009 के तहत सभी शादियों के पंजीयन के समय शादी में लिए उपहारों की सूची संलग्न करने के निर्देश देने का भी आग्रह किया। इस दौरान सरकार ने जानकारी दी कि प्रदेश में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत 308 मुकदमे लंबित हैं। अदालत ने दोनों प्रार्थना पत्रों पर सरकार से जवाब मांगा।