परम्परागत शीतल पेय

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राजस्थान ‘‘थार प्रदेश’’ भीषण गर्मी के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है – 45°c से ऊपर का तापमान चिलचिलाती धूप घर में बन्द रहने को मजबूर करता है, किन्तु कुछ पेय पदार्थ से हम इससे बच सकते है। गर्मियों का मौसम शुरू होने के कारण जयपुर भी इससे अछूता नहीं है। भीषण गर्मी, पसीने से तर-बरतर, सूर्य की तेज किरणें इस मौसम को ओर भी गर्म कर देती है। तेज गर्मी के कारण व्यक्ति की प्यास नहीं बुझती। बाजार के बोतल बंद पेय नुकसान तो करते है तथा इनसे थोड़ी देर बाद ही प्यास अधिक सताने लगती है। मौसम मुसीबत न बने और दैनिक कार्य यथावत चलते रहे, अपनी स्निग्घता बनाए रख सकें, इसके लिए कुछ पारम्परिक पेय ऐसे है, जिन्हें आजमाकर हम गर्मी को राहत पा सकते है।

जीरें का रस इन दिनो होने वाले फोड़े, फुंसी, घमौरियों को रोकता है, रक्त का शुद्धिकरण करता है एवं पाचन क्रिया को भी व्यवस्थित रखता है। आधा चम्मच जीरा रात को सोते समय पानी में भिगो दें। इससे आधी मात्रा के करीब मिश्री को अलग से भिगोंए। सुबह पानी से निकाल कर सिल पर बारीक पीस ले। थोड़ी सी पुदीने की पत्तियां धोकर जीरे के साथ पीसें। इस मिश्रण को एक छानने वाले कपड़े पर रखकर पानी की सहायता से छान लें। धुली हुई मिश्री मिलाएं। इस पेय को दिन में एक बार जरूर पीए। घर में बना यह शुद्ध पेय पीने में तो अच्छा लगेगा ही साथ ही दिलो-दिमाग में तरावट भी करेगा।

जौयाचनेकेपिसेछनेसतू  को मिश्री के साथ मिलाकर रखे। ठंडे पानी में घोलकर यह पेय सुबह के नाश्ते

में ले। इन दिनों यह पौष्टिक शीतल व तृप्तिदायक होगा। गर्मी की तड़प और प्यास बुझाने में दही, मटठा, छाछ, का भरपूर सेवन करे। नारियल पानी, गन्ने का रस, संतरा, पाइन एपल, मौसमी जैसे इस ऋतु के ताजे फलो के रस भी गर्मी कम करेगे। यह मस्तिष्क एवं उदर को शांति देने के साथ-साथ शरीर को शीतल एवं पुष्ट रखेंगे।

नीबू पानी चीनी का शर्बत शिंकजी, जलजीरा, पुदीने का शर्बत, ठड़ाई, लस्सी, छोटे देशी आम का पानी या दूध मिला रस और दूध ठंडा ही ले। ये भी इन दिनों शीतलता प्रदान करेगे। पेय पदार्थ और पानी कर मात्रा सही लेते रहे। तो गर्मी की परेशानियों से बचते हुए, इस ऋतु का मजा आसानी से ले सकेगे।

फालसा का शर्बतगर्मी में फालसा का फल आसानी से उपलब्ध है, इन्हें अच्छी तरह धोकर मिक्सी या हैण्ड ब्लेंडर से ठण्डा पानी मिलाकर बारीक पीस ले और बड़ी छलनी से छान ले डायबिटीज के रोगी इसे आराम से पी सकते है। अन्य व्यक्ति इसमें सादा मिश्री का शर्बत अथवा गुलाब शर्बत घर में बना हुआ, या बाजार उपलब्ध डालकर पी सकते है, दिन भर तरावट महसूस करेंगे।

पारम्परिक ठण्डाई –  बाजार में इसकी सामग्री उपलब्ध है – खसखस, तरबूज खरबूजे के बीज गुलाब की पंखुरियां बादाम बारीक पीस कर मीठे दूध या पानी के साथ पिया जा सकता है। डायबिटीज रोगी को बिना मीठा मिलाये ठण्डे फीके दूध के साथ पी सकते है।

खस का शर्बत –  खस का शर्बत, दिमाग की तरावट के लिए विशेष है। खस को आवश्यकतानुसार धो कर मिट्टी निकाल दे पानी उबाल कर पानी छान लें एवं चीनी या मिश्री डाल कर अच्छी तरह उबाल ले और छान कर ठण्डा करे, कांच की बोतल में भरकर रख लें, चाहे तो थोड़ा सा हरा रंग (खाने वाला) डाले।

 कैरी का पन्ना – यह कैरी के झोल के नाम से जाना जाता है। इसका सेवन करना रूचिवर्धक, जायकेदार एंव गर्मीनाशक है। सुबह के खाने के बाद इसे पीने से कितनी भी गर्मी में घूमने पर भी लू से बचें रहेगे। यदि लू लग भी गई है, तो शाम को भोजन में इसे सम्मिलित कर ले। सुबह तक समस्या का हल हो जाएगा। इसी तरह से इमली का झोल या शरबत जिसे ‘‘कट’’ कहा जाता है, बना सकते है। यह भी बहुत ही गुणकारी है। ये सभी तरीके बहुत ही शीतल व पाचक है।

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