आरोपों की जांच शुरु

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दारा सिंह एनकाउंटर केस में पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ को अधीनस्थ अदालत द्वारा आरोप मुक्त करने के फैसले को चुनौती देने के मामले में हाईकोर्ट की विजिलेंस कमेटी ने शुक्रवार से जांच शुरू कर दी। गांधीनगर स्थित क्लब हाउस में कमेटी के सामने जाट नेता राजाराम मील सहित दारा सिंह की पत्नी सुशीला देवी व भाई शीशराम के बयान हुए। इनके अलावा शिकायतकर्ता वकील सुमेर सिंह ओला के बयान भी दर्ज किए गए। तीनों ने बयानों में कहा कि अधीनस्थ अदालत के जज के 31 मई को राठौड़ को आरोप मुक्त करने के फैसले के दिन ही हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश ने अन्य आरोपी सरदार सिंह व सुरेन्द्र सिंह को जमानत पर रिहा किया था। ऐसे में 31 मई का राठौड़ को आरोप मुक्त करने का आदेश सोची समझी चाल के तहत हुआ है। ऐसे में स्पष्ट है कि राजेन्द्र राठौड़ ने ही पुलिस की मदद से फर्जी मुठभेड़ में दारा सिंह की हत्या करवाई और कार्यपालिका व न्यायपालिका में दखल देते हुए एफआईआर तक दर्ज नहीं होने दी। इस प्रक्रिया को हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने भी प्रभावित किया और अधीनस्थ अदालत के न्यायिक अफसरों से मनमाने व विधि के खिलाफ आदेश पारित करवाए। इसलिए हाईकोर्ट के संबंधित न्यायाधीशों व अधीनस्थ अदालत के न्यायिक अफसरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

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