फर्जी एजेंसियों से पुलिस परेशान

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शहर में हाल ही पुलिस कमिश्नरेट ने जांच करवाई तो 107 एजेंसियों के फर्जी तरीके से संचालित होने का पता चला है। इनमें से अधिकतर के पास प्रशिक्षित गार्ड ही नहीं हैं तो कुछ एजेंसियां रजिस्टर्ड नहीं हैं। असल में ये एजेंसियां कम शुल्क में सिक्योरिटी गार्ड उपलब्ध कराने की बात कहकर थड़ी ठेला संचालकों को गार्ड की वर्दी पहनाकर आयोजन स्थल पर भेज देती हैं। इसी तरह की तीन एजेंसियों का रजिस्ट्रेशन निरस्त करने के लिए पुलिस कमिश्नर ने मुख्यालय को पत्र लिखा है। पुलिस कमिश्नरेट की जांच में सामने आया है कि सिक्योरिटी एजेंसी संचालक की ओर से गार्डों का चरित्र सत्यापन ही नहीं कराया गया। गार्डों के पास संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी चरित्र सत्यापन का प्रमाण पत्र और किसी तरह का परिचय पत्र भी नहीं था। कुछ एजेंसियों ने परियच पत्र जारी किए, लेकिन उन पर एजेंसी का रजिस्ट्रेशन नंबर ही नहीं था। सिक्योरिटी गार्ड बनने से पहले प्रशिक्षण में शारीरिक सुरक्षा, वीआईपी की सुरक्षा, भवन या अपार्टमेंट की सुरक्षा, कार्मिक सुरक्षा, घरेलू सुरक्षा, आग बुझाने, भीड़ नियंत्रण करने, पहचान पत्रों की जांच करने के बारे में बताया जाता है।  पहचान दस्तावेज, आम्र्स यात्रा दस्तावेज और सुरक्षा निरीक्षण किट पर अंग्रेजी, अरबी, हिन्दी भाषा में लिखे शब्दों को पढऩे-समझने के बारे में बताया जाता है। इसके अलावा विस्फोटकों की पहचान, प्राथमिक उपचार, आपदा प्रबंधन, संकट में मुकाबला करने और सुरक्षा उपकरणों के उपयोग के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है।

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