तम्बाकू के जाल में समाज, छुटकारे का प्रयास

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तम्बाकू मुक्त विद्यालय कार्यक्रम

हमारे समाज में बहुत सी बुराईयां हैं जिनमें गुटखा, तंबाकू और धूम्रपान के सेवन ने समाज को बुरी तरह अपने जाल में जकड़ा हुआ है। ऐसा नहीं है कि हम इन उत्पादों के नकारात्मक प्रभाव से वाकिफ नहीं हैं। लेकिन जानते बूझते भी हमारा समाज और खास तौर से युवा पीढ़ी नशे की लत में फंसी हुई है। सरकार हर स्तर पर गुटखा, तंबाकू और धूम्रपान के अभिशाप से समाज को मुक्त करने के प्रयासों में जुटी है लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति में कुछ कमियां भी हैं जिनके कारण समाज नशामुक्त नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में गुटखा, तंबाकू और धूम्रपान का सेवन करने वालों के आंकड़े भयावह हैं। सरकार और सामाजिक संगठन मिलकर इस अभिशाप से लड़ रहे हैं और कई अभियान चलाकर बच्चों और युवाओं में तंबाकू सेवन के खतरों के प्रति जागरुकता पैदा करने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। ऐसा ही एक अभियान है ‘तंबाकू मुक्त विद्यालय कार्यक्रम’।

समस्या

आज जब हम घर से निकलते हैं तो हर गली, हर चौराहे पर हमें दर्जनों थडियां मिल जाती हैं, जहां खुले आम तंबाकू उत्पाद बेचे जाते हैं। हालांकि सरकार ने तंबाकू निषेध कानून लागू कर दिया है और राज्य में गुटखा की बिक्री पर रोक लगा दी है। लेकिन गुटखा पर रोक का कोई असर नहीं दिखाई देता। सरकार गुटखा बंद करने के नाम पर थडियों और दुकानों पर कार्रवाई करती है जबकि बड़ी फैक्ट्रियां बदस्तूर अपना काम कर रही हैं। गुटखे को प्रतिबंधित कर दिया है तो गुटखा कंपनियां भी दूसरा विकल्प लेकर बाजार में हैं। सुपारी और जर्दे को अलग-अलग पाउच में उपलब्ध कराकर नशे की लत के आदियों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे गुटखे पर प्रतिबंध एक हास्यास्पद कानून बनकर रह गया है। इसके अलावा खुले आम खैनी, जर्दा और सिगरेट भी बेची जा रही है। भयावह बात यह है कि स्कूल के छोटे बच्चों में भी बड़े पैमाने पर गुटखा और सिगरेट की लत देखी जा रही है, जो नशेमुक्त समाज के सपने को तोड़ने के लिए पर्याप्त है।

समाधान

गुटखा, तंबाकू और धूम्रपान की लत में फंसे समाज को इस जाल से बाहर लाने के लिए सरकार और प्रशासन की ओर से अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बहुत सारे कानून बनाए गए हैं जिससे तंबाकू उत्पादों की बिक्री और सेवन को नियंत्रित किया जाता है। जैसे स्कूल परिसर से सौ मीटर के दायरे में तंबाकू उत्पाद बेचने पर पाबंदी, दुकानदारों पर 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर पाबंदी और सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान आदि करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई। आपने देखा होगा टीवी और अखबार में भी धूम्रपान या तंबाकू का महिमामंडन करने वाले विज्ञापनों पर रोक लगा दी गई है। टीवी पर फिल्म में तंबाकू या धूम्रपान के दृश्य के साथ यह चेतावनी जारी की जाती है कि धूम्रपान का सेवन जानलेवा है और अमुक कलाकार किसी भी तरह धूम्रपान का सेवन नहीं करता। इसके अलावा तंबाकू और सिगरेट के पैकेट पर बिच्छू, रोगग्रस्त फेफड़े और कैंसर पीडि़त मुंह की आकृति चित्रित कर तंबाकू के जानलेवा होने का संदेश दिया गया है। लेकिन ये सभी समाधान पर्याप्त नहीं हैं। तंबाकू के खतरों से अगली पीढ़ी को बचाने लिए और भी सकात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है। ’तंबाकू मुक्त विद्यालय’ कार्यक्रम ऐसा ही सार्थक और सकारात्मक कदम है।

तंबाकू मुक्त विद्यालय कार्यक्रम

जयपुर जिले में 14 फरवरी से 1 मार्च तक ’तंबाकू मुक्त विद्यालय’ कार्यक्रम चलाया गया। राष्ट्रीय टेबैको कंट्रोल प्रोग्राम के तहत कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अिधकारी जयपुर प्रथम की ओर से जिला तंबाकू नियंत्रण सेल व रस रंग मंच संस्था ने जयपुर जिले के लगभग पचास स्कूलों में स्लाइड शो के माध्यम से बच्चों को तंबाकू उत्पादों और उनके सेवन से होने वाले खतरों की जानकारी दी। रस रंग मंच के सदस्यों ने स्लाइड शो के साथ नाट्य अभिक्षमता का अच्छा प्रयोग करते हुए मनोरंजक तरीके से बच्चों को तंबाकू के खतरों के प्रति आगाह किया। यह कार्यक्रम जयपुर जिले के स्कूलों को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए किया गया था।

रस रंग मंच संस्था ने मनोरंजक बनाया अभियान

अभियान को मनोरंजक ढंग से स्कूल के बच्चों तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने थिएटर के मंझे हुए कलाकारों का सहयोग लिया। विभाग ने स्कूलों तक तंबाकू मुक्ति का संदेश पहुंचाने की जिम्मेदारी रस रंग मंच संस्था को दी। संस्था के अध्यक्ष रंगमंच कलाकार हिमांशु झांकल के अलावा रति महर्षि और रवि टांक ने मिलकर स्लाइड शो कार्यक्रम की मनोरंजक प्रस्तुति कर स्कूलों के बच्चों को प्रभावित किया।

16 दिन का सफर

तम्बाकू मुक्त विद्यालय कार्यक्रम 14 फरवरी से आरंभ हुआ। कार्यक्रम का समापन 1 मार्च को आदर्शनगर स्थित दीपशिखा स्कूल में तम्बाकू मुक्ति का संदेश देकर हुआ। वहीं रस रंग मंच के अध्यक्ष हिमांशु झांकल और उनके सहयोगी कलाकारों रवि टांक और रति महर्षि से मुलाकात हुई। हमने थिएटर के इन कलाकारों से कार्यक्रम के बारे में बात की और बच्चों को नशामुक्त रखने या नशामुक्त करने के उपायों पर गौर किया। सबसे पहले संस्था की ओर से किए गए सोलह दिनों के सफर पर नजर डालते हैं-

रस रंग मंच के अध्यक्ष हिमांशु झांकल ने बताया कि अभियान के तहत जयपुर जिले के पचास स्कूलों को कवर किया गया। ज्यादातर स्कूल सरकारी थे। जबकि कुछ चुनिंदा निजी विद्यालयों को भी अभियन में शामिल किया गया। हिमांशु ने बताया कि निजी विद्यालयों की अपेक्षा सरकारी स्कूल के बच्चों में नशे की लत ज्यादा पाई गई। इसका कारण पारिवारिक और सामाजिक परिवेश के साथ साथ स्कूलों में टीचर्स द्वारा बरती जाने वाली लापरवाही भी है। सरकारी स्कूलों में शिक्षक बच्चों पर कठोन नजर नहीं रख पाते हैं। झांकल ने इन 16 दिनों में सरकारी स्कूलों में पेश किए कार्यक्रमों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि कई स्कूलों के शिक्षक भी तंबाकू की लत से पीडित मिले। लेकिन वे टीम के सामने खुलकर नहीं आ पाए। जहां बच्चों के लिए स्लाइड शो होते थे वहां वे शिक्षक नहीं फटकते थे। क्यूंकि बच्चे भी उनकी लत से वाकिफ थे। कुछ शिक्षकों ने टीम से मिलकर बताया कि वे तंबाकू की लत से कई वर्षों से पीडि़त हैं और अब इस अभियान में स्लाइड शो से मिली जानकारी के बाद वे इस लत को छोड़ना चाहते हैं। स्कूल के बच्चों ने भी कार्यक्रम के दौरान छात्रों की पोल पट्टी खोली। मनोरंजन के दौर में सामने आया कि सरकारी स्कूल के बच्चे किस कदर तंबाकू की गिरफ्त में हैं।

हिमांशु ने बताया कि अभियान के तहत जयपुर शहर के अलावा जयपुर जिले कोटपूतली, पावटा, विराटनगर, सांभर, फुलेरा, चाकसू और शिवदासपुरा आदि अनेक गांवों और कस्बों को कवर किया गया था।

रस रंग मंच संस्था के कलाकार रवि टांक ने बताया कि बच्चों को स्लाइड शो के जरिए जानकारी दी गई कि तंबाकू में निकोटिन जैसे हानिकारक रसायन होते हैं जो बच्चों के कोमल शरीर और मस्तिष्क के लिए हानिकारक हैं। सिगरेट को तैयार करने में तारकोल, निकोटिन, अमोनिया आदि चार हजार के लगभग हानिकारक रसायन प्रयोग में लिए जाते हैं। सिगरेट को होठ पर लगाते ही विनायल क्लोराइड अपना काम करना शुरू कर देता है और यह बहुत नुकसानदेह होता है।

अभियान से जुड़ी थिएटर कलाकार रति महर्षि ने कहा कि गुटखा तंबाकू और सिगरेट के सेवन से कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। इनके सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियां जैसे कैंसर, अस्थमा, हृदय रोग, दांत खराब होना, गुर्दे खराब होना आदि शरीर को जकड़ लेती हैं। इनके सेवन से थकान रहना, मानसिक क्षमता कम होना, मुंह से बदबू आना आदि प्रत्यक्ष प्रभावों में आते हैं। जबकि अप्रत्यक्ष प्रभावों में समाज और परिवार में सम्मान घटना, धन का अपव्यय जैसे नुकसान होते हैं। रति ने कहा कि इन लतों के चक्कर में कई बार परिवार में टूटन की स्थिति भी पैदा हो जाती है। रति ने कहा कि यह सच है कि ऐसे अभियन चलाकर या तंबाकू उत्पादों पर विज्ञापन चिपकाकर बच्चों को इस लत से नहीं बचाया जा सकता। बच्चों को नशे की लत से बचाने के लिए परिवार के सदस्यों को पहल करनी चाहिए। बच्चों पर खास नजर रखने की जरूरत है और यदि बच्चे में इस लत का पता चलता है तो शांति और प्रेम से बच्चों को समझाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चे अगर सुपारी भी खाते हैं तो अभिभावकों को उन्हें रोकना चाहिए।

स्कूलों में अभियान

स्कूलों में इस अभियान के तहत स्लाइड शो और नाट्य अभिक्षमता का इस्तेमाल किया गया। हर स्कूल को दो से तीन घंटे का समय दिया गया था। इसके तहत रस रंग मंच संस्था के कलाकारों ने स्कूलों में जाकर नशामुक्ति के संदेश लिखे बैनर और पोस्टर चिपकाए। इसके बाद बच्चों को एक हॉल में बिठाकर स्लाइड शो की प्रस्तुतियों से तंबाकू और तंबाकू से होने वाले जानलेवा खतरों के बारे में समझाया गया। कलाकारों ने मनोरंजक प्रस्तुति से कार्यक्रम को रोचक बना दिया और बच्चों से सवाल जवाब भी किए। शिक्षकों की मौजूदगी में बच्चों को नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई गई। रवि टांक ने बताया कि कार्यक्रम को यदि सीधे स्लाइड शो से प्रस्तुत किया जाता तो बच्चे इसमें खास रूचि नहीं दिखाते लेकिन थिएटर के कलाकारों का इस्तेमाल कर अभियान में जान डाल दी गई। कलाकारों ने हर स्लाइड पर लिखे संदेश को रोचक अभिनय के द्वारा बच्चों तक सुगमता से पहुंचाया और बेहतर काउंसलिंग की। उन्होंने कहा कि अभिभाषण क्षमता से अभियान और ज्यादा प्रभावशाली हो गया। टांक ने बताया कि जिन स्कूलों में स्लाइड शो दिखाने के लिए  बिजली की व्यवस्था नहीं होती वहां बैटरी का प्रयोग कर यह शो दिखाया गया।

स्कूल के 100 मीटर दायरे में तंबाकू विक्रय की शिकायत

अभियान के तहत टीम ने स्कूलों के पास सौ मीटर के दायरे में आने वाली उन दुकानों का चिन्हीकरण किया जहां से तंबाकू उत्पादों की बिक्री की जा रही थी। टीम सदस्यों ने दुकानदारों से बात की और उन्हें बच्चों को तंबाकू उत्पाद न बेचने के निर्देश दिए। टीम ने स्वास्थ्य विभाग को लगभग 20 ऐसी दुकानों की भी शिकायत की जो बच्चों को तंबाकू उत्पाद बेच रहे थे।

बच्चों ने ली नशामुक्ति की शपथ

आदर्शनगर स्थित दीपशिखा स्कूल में अभियान के समापन के दिन 1 मार्च को बच्चों का काफी उत्साह दिखा। बच्चों की प्रतिक्रिया उत्साहवर्धक थी। स्कूल की प्राचार्या शोभना सचदेवा ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। यह काफी उत्साहजनक है कि बच्चे इस तरह के शो में रूचि रखते हैं और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत बच्चों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन बच्चों में नशा करने की लत का पता चलता है उन्हें दंडित करने के स्थान पर उनके अभिभावकों से इस बारे में बात कर बच्चे को सकारात्मक तरीकों से लत की हालत से बाहर लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

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  1. जयपुर में धुलंडी के दूसरे दिन शाम से ही बादल रह रह कर बरसे। यह मौसम बदलने की निशानी है। गर्मियां शुरू हो गई हैं और इसी के साथ अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भी गर्मियों की शुरूआत के मद्देनजर अस्पताल के खुलने का समय बदल गया है। 1 अप्रैल से सभी सरकारी अस्पताल सुबह जल्दी खुलेंगे। सरकारी अस्पतालों के आउटडोर का समय 1 अप्रैल से सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे होगा। राजपत्रित अवकाश के दिन यह समय सुबह 9 बजे से 11 बजे रहेगा। एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े एसएमएस अस्पताल, जेके लोन, जनाना अस्पताल चांदपोल, महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट, श्वास रोग संस्थान, गणगौरी अस्पताल और मनोचिकित्सालय में यह समय परिवर्तन होगा। जिला, सेटेलाइट और डिस्पेंसरियों के दो पारियों का समय सुबह 8 से 12 और शाम को 5 से 7 बजे रहेगा। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की आरोग्य शला, बंबईवाला हास्पिटल, किशनपोल बाजार व सेटेलाइट अस्पताल जैसे गोल मार्केट, जवाहर नगर का आउटडोर 1 अप्रैल से सुबह 8 से 2 बजे रहेगा। राजकीय अवकाश और रविवार के दिन ओपीडी का समय सुबह 9 से 11 बजे तक रहेगा।

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