राजस्थान दिवस समारोह

राजस्थान की राजधानी जयपुर में 30 मार्च को राजस्थान दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजधानी जयपुर के विभिन्न पर्यटक स्थलों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में इस अवसर पर आम जन के लिए निशुल्क प्रवेश की सुविधा भी दी गई। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए बड़ी संख्या में लोग घरों से निकले और आमेर महल, अल्बर्ट हॉल और हवामहल जैसे पर्यटन केंद्रों पर पहुंचे।

अल्बर्ट हॉल – दांगड़ी ढोला और कुचामनी नृत्य

समारोह के तहत अल्बर्ट हॉल पर सुबह 9.30 बजे से शाम 5 बजे तक बांसवाड़ा के नारायण डामोर और उनके साथियों ने दांगड़ी ढोला नृत्य तथा नागौर के कुराड़ा गांव के लोक कलाकारों ने कुचामनी शैली का नृत्य पेश कर अल्बर्ट हॉल पहुंचे पर्यटकों का मनोरंजन किया।
दांगड़ी ढोला नृत्य बांसवाड़ा का आदिवासी नृत्य है जिसे नारायण डामोर की पार्टी ने बखूबी पेश किया। इस सामूहिक नृत्य को ग्रुप के 12 सदस्यों ने मनमोहक अदाओं के साथ पेश किया। ग्रुप का नेतृत्व नारायण डामोर ने किया। दांगड़ी ढोला नृत्य की खास बात यह है कि बांसवाड़ा के आदिवासी इलाकों में विवाह के अवसर पर पंद्रह दिन तक उल्लास व्यक्त करने के लिए किया जाता है। आदिवासियों में इसे वागड़ी नृत्य के नाम से भी जाना जाता है। यह नृत्य ढोल, कुण्डी, थाली और कामड़ी की धुनों पर किया जाता है। नृत्य में पुरुषों का पहनावा धोती, साफा और झबला होता है जबकि महिलाओं का पहनावा लाल बुंदकीदार ओढनी, जेला, घाघरा और बोरला होता है। ग्रुप के 8 लोग नृत्य करते हैं और शेष 4 साजों पर होते हैं। टीम में हरीश नीनावां, किसन, मणिलाल, कलिया भाई, रमीला, कैलाश, कृपा, पपीता, सीमा, पार्वती और सविता शामिल थीं।
अल्बर्ट हॉल पर ही दूसरी पार्टी  थी नागौर के कुराड़ा गांव के कलाकार। इन्होने राजस्थानी कुचामनी शैली का मनमोहक नृत्य किया। कुचामनी शैली में हारमोनियम, ढोलक, नगारा और खडताल की धुनों पर धमाल और लोकगीत गाए जाते हैं। इन गीतों में राजा महाराजाओं की कहानियों किस्सों और वीरता के वर्णन को नाच गाकर सुनाए जाने की परंपरा है। सभी कलाकारों का पहनावा हरी अंगरखी, साफा और धोती होती है। महिलारूप में कलाकार घाघरा चोली और ओढनी पहनते हैं। ग्रुप लीडर शहजाद ने बताया कि कुचामनी शैली का नृत्य सैंकड़ों वर्षों से परंपरा में है। पहले यह राजा महाराजाओं की महफिल में पेश किया जाता था। इसके बाद राजदरबारों से निकलकर कलाकार गांव गांव में मारवाड़ी ख्याल पेश करने लगे। इनमें वे लोगों को तेजाजी, रामदेव, भृतहरि, हरिशचंद्र, महाराणा प्रताप जैसे लोकनायकों के जीवन का संगीतमय चित्रांकन करते थे। जयपुर दिवस के मौके पर पहली बार उन्हें जयपुर में अपने हुनर को पेश करने का मौका मिला। ग्रुप में 8 सदस्य थे। हालांकि इस नृत्य में सभी सदस्य पुरूष थे लेकिन दो सदस्य महिला पोशाकों में नृत्य कर लोगों का मनोरंजन करते हैं। यहीं इस नृत्य की खास बात हैं। नृत्य में महिला के रूप में तसलीम ने साइकिल की रिम से विभिन्न करतब दिखाकर लोगों का खूब मनोरंजन किया। नृत्य में तसलीम के अलावा इकबाल, शहजाद और महावीर ने भी सभी का ध्यान आकर्षित किया। इसके अलावा नगारे पर हनीफ, बाजे पर छोटू, ढोलक पर सद्दाम और करताल पर दानिश ने अच्छा परफोर्मेंस दिया। ग्रुप का प्रतिनिधित्व शहजाद ने किया।

स्टेच्यू सर्किल- गैर एवं चकरी नृत्य

राजस्थान दिवस समारोह के उपलक्ष में जयपुर के स्टेच्यू सर्किल पर राजस्थान के प्रसिद्ध गैर एवं चकरी नृत्य का कार्यक्रम सुबह से शाम तक किया गया।
स्टेच्यू सर्किल पर बालोतरा के थार ट्रेडिशनल ग्रुप ने गैर नृत्य पेश किया। गैर नृत्य का मूल बांसवाड़ा के बालोतरा से है। रबी की फसल पकने के बाद जब उसे खलिहानों में एकत्रित कर लिया जाता था तब होली आसपास होने और फसल प्राप्त करने की खुशी में गांव के लोग एकत्र होकर गैर नृत्य किया करते थे। गैर नृत्य में लाल अंगरखी, सफेद अंगी, धोती, पायड़ पहनी जाती है। खास बात यह है कि इन कलाकारों की लाल अंगरखी 24 किलो वजन की होती है ताकि घेर लेते समय अंगरखी का लुक सही आए। परंपरागत पोशाकों का कुल वजन 85 किलो तक होता है। नृत्य के सभी कलाकार पुरूष होते हैं। नृत्य करते समय ये लोग पैरों में घुंघरू बांधते हैं और हाथों में बांस की पतली डंडिया भी रखते हैं। आम तौर पर नृत्य के ग्रुप में 16 लोग होते हैं। इनमें 2 पुरूष महिलाओं की पोशाक में होते हैं। सभी कलाकार ढोल और थाली की थापों पर राजस्थानी गीत गाते हुए नृत्य करते हैं। गैर नृत्य ने राजस्थानी गीतों ’ जीरो जीव रो बैरी रे, मत बाओ परणिया जीरो..’ और ’बालम छोटो सो..’ को वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध कर दिया है। दल के मुखिया मोटाराम ने बताया कि राजस्थान दिवस से पहले वे जयपुर के ही पोलो ग्राउंड में 26 मार्च को हुए होली उत्सव में भी परफोर्मेंस कर चुके हैं। इससे पहले उनके दल ने तीन बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में राजस्थान का प्रतिनिधित्व भी किया है। स्टेच्यू सर्किल पर परफोर्मेंस करने वाले दल में मोटाराम के अलावा प्रेम, मुकेश, श्रवण, नारायण, जोगेन्दर, पवन, झोटाराम, सीताराम, वासुदेव, लेखराज, भैराराम, सोहन, छोटा श्रवण, गणपत और ललित शामिल थे।
स्टेच्यू सर्किल पर ही बारां की छबड़ा तहसील के कलाकारों ने चकरी नृत्य भी पेश किया। नृत्य में पुरूष गीत गाते हैं व साज बजाते हैं वहीं महिलाएं मनमोहक नृत्य करती हैं। दल के प्रमुख उदयसिंह ने बताया कि चकरी नृत्य में छह महिलाएं व चार सदस्य पुरूष होते हैं। चकरी का अर्थ चक्र के रूप में घूमकर नृत्य करना होता है। यह नृत्य राजस्थानी गीतों पर किए जाते हैं। नृत्य ने राजस्थानी गीत ’अस्सी कली का घाघरा’ को विश्व में ख्याति दिलाई है। साजों में ढोली, नगाड़ा, मझीरा और खंजरी का इस्तेमाल किया जाता है। पुरूषों की पोशाक बुंदकीदार साफा, कमीज और धोती होती है वहीं महिलाओं की पोशाक घाघरा कुरती, कांचली, पजामा और घुंघरू होते हैं। इस दल ने भारत  के अलावा रूस, पाकिस्तान व अन्द देशों में प्रस्तुतियां की हैं।

आमेर महल – मारवाड़ी लोकगायन

आमेर महल में राजस्थान दिवस के उपलक्ष में बाड़मेर के बुन्दू खां एवं साथियों में विभिन्न राजस्थानी रागों से पर्यटकों का मन मोह लिया। मारवाड़ी लोकगायन के तहत पार्टी ने ’गोरबंद नखराळो’, ’ दमादम मस्त कलंदर’ और ’पधारो म्हारे देस’ गीतों पर प्रस्तुति दी। इस अवसर पर कलाकारों ने पारंपरिक वाद्यों पर लोकधुनें निकाल कर समां बांध दिया। इसके अलावा लोककलाकार हनुमान भोपा ने परंपरागत वाद्य रावण हत्था पर विभिन्न धुनें निकालकर सभी का खूब मनोरंजन किया। बुन्दू खां ने भी खड़ताल पर विभिन्न धुनें निकालकर खूब वाहवाही लूटी।

जलमहल की पाल- राजस्थानी गीत

कार्यक्रम के तहत सुबह से शाम तक जलमहल की पाल पर लोक नृत्य पेश कर पर्यटकों का बखूबी मंनोरंजन किया। कार्यक्रम में लोक कलाकार राजुभाट ने कठपुतली शो पेश कर सभी की खूब दाद पाई वहीं बारां के भगवान सिंह एवं उनके साथियों ने चकरी नृत्य पेश किया गया। इस मौके पर कई बार विदेशी पर्यटक भी नृत्य करती नृत्यांगनाओं के साथ नाच उठे। राजस्थान दिवस समारोह के तहत किए गए कार्यक्रमों की श्रंखला में यहां लोकगीतों का आनंद उठाने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय पर्यटक भी मौजूद थे।

हवामहल- शहनाई वादन

हवामहल पर मुरारी लाल राणा ने शहनाई वादन किया। हवामहल का जीर्णोद्धार कार्य चलने के बावजूद यहां बड़ी संख्या में पर्यटक मौजूद थे। उन्होंने शहनाई वादन का लुत्फ उठाया और हवामहल की फोटो भी क्लिक की।

जवाहर कला केंद्र में शाम हुई रोशन-

राजस्थान दिवस समारोह के उपलक्ष में जवाहर कला केंद्र में फूड कोर्ट जहां उफान पर था वहीं मशहूर कथक नृत्यांगना पर्निया कुरैशी ने अपने मोहक अंदाजों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।  जेकेके पर कला प्रेमियों के लिये सायं 7 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पर्यटन मंत्री बीना काक और प्रमुख सचिव एवं आयुक्त पर्यटन, राकेश श्रीवास्तव थे।
कार्यक्रम में कथक केन्द्र के कत्थक कलाकारों एवं लंगा-मांगणियार कलाकारों के मांड की फ्यूजन प्रस्तुती पेश की गई। इसके पश्चात् पर्निया कुरैशी द्वारा कुचीपुड़ी नृत्य और सुफी गायन ’जब से तूने दिवाना बना रखा है’ तथा तराना पर कार्यक्रम प्रस्तुत कर सबको सम्मोहित कर दिया। इसके बाद राजस्थान के अन्य प्रसिद्ध लोक कलाकारों द्वारा भपंग, चरी, तेरहताली, कालबेलिया, एवं मयूर नृत्यों से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी।

राजस्थान दिवस समारोह के तहत जेकेके के शिल्पग्राम में चलाये जा रहे फूड एण्ड क्राफ्ट मेले का समापन 31 मार्च को हुआ।

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