जयपुर : पर्यटन का ऑफ सीजन हो जाए ऑन

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जयपुर पूरी दुनिया में अपने कल्चर, ट्रेडिशन और हेरिटेज लुक के कारण पहचाना जाता है। सर्दियों के मौसम में यहां जबरदस्त पर्यटन होता है और बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक जयपुर के महल, किले, पुराने बाजार और हवेलियां देखने यहां आते हैं। इसके अलावा यहां के पर्व, मेलों और उत्सवों में भी बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी जयपुर आते हैं। बड़ी संख्या में सैलानियों के आने से जयपुर का होटल व्यवसाय और बाजार समृद्ध होता है। लेकिन जैसे ही गर्मियां शुरू होती हैं जयपुर में पर्यटन सीजन ऑफ हो जाता है। इसका कारण है जयपुर में गर्मियों का तापमान 48 डिग्री तक पहुंच जाना। ऐसे में पर्यटक ठंडे इलाकों का रूख करते हैं।

लेकिन अगर सरकार, पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन चाहे तो जयपुर जैसे खूबसूरत शहर में गर्मियों के मौसम में भी पर्यटन को बढावा दिया जा सकता है। ऐसा हुआ तो जयपुर में सालभर पर्यटकों की भरमार रहेगी और जयपुर पर्यटन के क्षेत्र में बहुत समृद्धि करेगा। जयपुर शहर अपने आप में एक संपूर्ण विश्व विरासत है। यहां का परकोटा क्षेत्र पूरे का पूरा एक म्यूजियम है। जयपुर और इसके आसपास पर्यटन की इतनी संभावना है कि साल भर यहां पर्यटकों का तांता लग सकता है। सैलानियों के आने से जयपुरवासियों की आय में भी इजाफा होगा। जयपुर में गर्मियों में पर्यटन को प्रमोट करने करने के लिए सरकार को यहां रात में पर्यटन को बढावा दिया जाना चाहिए। आइये, ऐसे कई पहलुओं पर विचार करें, जिनमें गर्मियों में भी जयपुर पर्यटन समृद्ध रहे-

रात में परकोटे में वाहनों का प्रवेश बंद

परकोटा शहर हमारी विरासत है। दुनियाभर में जयपुर की वॉल सिटी अपनी खास पहचान रखती है। हालांकि परकोटा में घनी आबादी होने के कारण यहां रात में यातायात के साधन बंद करने से परेशानी होगी लेकिन चौपहिया वाहनों को रात में परकोटा में प्रवेश से रोक कर यहां रात्रि पर्यटन को जबरदस्त बढावा दिया जा सकता है। चौपहिया और भारी वाहन बंद कर यहां यातायात के अन्य साधनों को विकसित किया जाना चाहिए। जैसे इलैक्टॉनिक छोटी गाड़ियां जो  हर चौपड़ और गेट पर आम जन के उलब्ध हों। इसके अलावा तांगों को एक बार फिर प्रमोट करने की जरूरत है। रात में वाहनों की आवाजाही नहीं होने से पर्यटन जयपुर की खूबसूरती को आराम से निहार सकेंगे। दिन में भारी यातायात के चलते जयपुर के बाजारों की खूबसूरती छुप जाती है।

रात में खुलें बाजार

स्थानीय प्रशासन को व्यवसाइयों को रात में बाजार खोलने की अनुमति देनी चाहिए। रात में बाजार खुलने से दिन में बाजारों से भीड़ का दबाव तो हटेगा ही साथ ही व्यापारियों को भी मुनाफा होगा। जो लोग दिन में खरीददारी नहीं कर पातें हैं वे परकोटा में रात में खरीददारी कर सकें। रात में बाजार खुलने से शहर में रौनक रहेगी और पर्यटक इस रौनक का आनंद उठाएंगे।  जयपुर में कुछ अवसरों पर रात्रि बाजार की इजाजत होती है, ऐसे में जयपुर की खूबसूरती देखते ही बनती है।

परकोटा शहर में शानदार लाइटिंग

परकोटा शहर को रात्रि में खूबसूरत दिखाने के लिए वैसी ही लाइटिंग होनी चाहिए जैसे थाई देशों में होती है। गौरतलब है कि थाई देशों ने पर्यटन के क्षेत्र में जबरदस्त तरक्की की है और इसमें वहां की नाइटलाइफ का भी बड़ा योगदान है। जयपुर परकोटा के प्रमुख स्थलों को ठीक उसी तरह सजाया जाना चाहिए जैसे दीवाली पर सजावट होती है। ऐसा करने से रात्रि में घूमने का आकर्षण बढेगा। पर्यटकों को भी रात के समय खूबसूरत और जगमगाते जयपुर को देखने के लिए दीवाली का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

चौपड़ों पर हो सांस्कृतिक कार्यक्रम

पर्यटकों को लुभाने के लिए छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड पर सांस्कृति कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए। साथ ही चौपड़ों के फव्वारों को भी विकसित कर आधुनिक फाउंटेनिंग लगानी चाहिए। यहां लाइट और फाउंटेन शो भी आयोजित किये जा सकते हैं। फिर यहीं कुछ अवसरों पर रेड डांस जैसे आयोजन भी किए जा सकते हैं। चौपड़ों का और अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। यहां मनोरंजन के लिए बहुत सारे प्रयोग किए जा सकते हैं। अस्थायी ओपन बार बनाए जाने चाहिएं। साथ ही चौपाटियों की व्यवस्था भी यहां की जा सकती है। इससे छोटे व्यापारियों को भी लाभ होगा।

डिवाइडर हटा दिए जाएं परकोटा में

जयपुर की जब स्थापना हुई थी तब यहां मुख्य मार्गों के बीच में डिवाइडर नहीं थे। तब ये ही सडकें बहुत चौडी हुआ करती थी। जयपुर में यातायात के सुचारू संचालन के लिए यहां सडक बनाकर डिवाइडर बना दिए गए। इससे सडकें संकडी हो गई और यातायात के दबाव के चलते शहर की हालत खराब हो गई। अगर परकोटा में भारी वाहनों और चौपहिया वाहनों का प्रवेश बंद कर दिया जाए तो डिवाइडर की जरूरत नहीं रहेगी और सड़कें चौडी और बेहतर दिखाई देंगी।

जयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों को दिखाया जाए रात में

जयपुर में आमेर महल, मावठा, जलमहल, हवामहल, अल्बर्ट हॉल, जंतर मंतर और सिटी पैलेस जैसे स्थानों को रात में देखने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके लिए परकोटा से विशेष वाहनों से सैलानियों को ये ऐतिहासिक इमारतें दिखाने के लिए ले जाया जा सकता है। इसके साथ ही रात के समय आमेर के मावठे और जलमहल की मानसागर झील पर विशेष लाईटिंग और बोटिंग की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।

हिंद होटल, शिमला होटल को किया जाए प्रमोट

परकोटा में रात्रि में सैलानियों को विशेष सुविधाएं देने के लिए त्रिपोलिया बाजार स्थित हिंद होटल और हवामहल रोड स्थित शिमला होटल को विशेष रूप से प्रमोट किया जाना चाहिए। ताकि सैलानी रात्रि में भ्रमण करते हुए इन होटलों में राजस्थानी जायके का स्वाद ले सकें और कुछ देर आराम भी कर सकें। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पुलिसिंग का दायरा भी बढाया जाना चाहिए।

जलेब चौक, चांदनी चौक, चौगान स्टेडियम का हो उपयोग

रात्रि में पर्यटन को बढावा देने के लिए परकोटा क्षेत्र में इन तीन खुले बड़े स्थानों का अच्छा प्रयोग किया जा सकता है। जलेब चौक, चांदनी चौक और चौगान स्टेडियम में पर्यटकों के लिए विभिन्न मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। इसके तहत बड़ी स्क्रीनों पर जयपुर के इतिहास, महलों और ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी दी जा सकती है। इसके अलावा कई रचनात्मक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा सकता है।

मंदिरों में हो सभी प्रबंधन व्यवस्थाएं

जयपुर में परकोटा क्षेत्र में कई विशाल मंदिर हैं। स्थापना के समय बने ये मंदिर ज्यादातर देवस्थान विभाग के अधीन हैं। जयपुर परकोटा में हर बाजार में पांच दस मंदिर है। इन मंदिरों का उपयोग जयपुर में रात्रि में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को ऑपरेट करने, पुलिसिंग, निगरानी, पर्यटकों के आराम करने की जगह के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसा होने से पर्यटकों को शहर भर में घूमने के बाद कहीं आराम करने की जगह मिल सकेगी। इन मंदिरों में लाइब्रेरियां भी विकसित की जा सकती हैं। इससे स्थानीय निवासियों को भी फायदा होगा।

जयपुर में रात्रि पर्यटन को बढावा देने के लिए इन सुझावों पर अमल किया जा सकता है। रात में आम जनजीवन गलत तरह से प्रभावित न हो इसके लिए लाउडस्पीकरों पर रोक लगाई जा सकती है। सभी कार्यक्रम शांति और बिना माइक की सहायता आयोजित किए जा सकते हैं। फिर ये भी है कि साल भर ये रात्रि पर्यटन नहीं होगा। इसके लिए कुछ सीजन तय किया जाना चाहिए। सर्दियों में रात्रि पर्यटन को बंद रखा जा सकता है। बारिश के दिनों में भी रात्रि पर्यटन को बंद रखा जा सकता है। यह प्रयोग गर्मियों के मई-जून-जुलाई तीन महिनों तक किया जा सकता है। निश्चित रूप से जयपुर पर्यटन को इस प्रयोग से फायदा होगा।

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2 comments

  1. किशनपोल में पार्किंग शुल्क
    जयपुर के जौहरी बाजार, चौडा रास्ता और बापू बाजार के बाद किशनपाले बाजार में भी 1 जून से पार्किंग व्यवस्था बदल जाएगी। इन बाजारों में आने वाले ग्राहकों को वाहन खडा करने के लिए शुल्क देना होगा। यहां भी सुबह 10 से रात 8 बजे तक सशुल्क पार्किंग व्यवस्था होगी। इस दौरान स्थानीय लोगिों व व्यापारियों को रामनिवास बाग पार्किंग परिसर में वाहन खडे करने के लिए जेडीए रियायती दर पर सौ पास जारी करेगा। चौपहिया वाहन चालकों सं वाहन खडा करते ही प्रीमियम शुल्क वसूला जाएगा जबकि दोपहिया वाहन चालक पहले घंटे निशुल्क वाहन खडा कर सकेंगे। दोनो ही वाहनों की पार्किंग सीमा अधिकतम दो घंटे रहेगी। इस मियाद के बाद ट्रैफिक पुलिस पेनल्टी की कार्रवाई करेगी। पार्किंग शुल्क नगर निगम स्तर पर लिया जाएगा। जिसके लिए जल्द ही निविदा प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पार्किंग व्यवस्था की समीक्षा के लिए गुरूवार को जेडीए आयुक्त कुलदीप रांका की अध्यक्षता में हुई बैठक में व्यापार मंडल की मांग के बाद यह निर्णय लिया गया। पार्किंग व्यवस्था से जुडी तैयारियों का जिम्मा डीसीपी ट्रेफिक व नगर निगम को सौंपा गया।
    दुपहिया के लिए दो लेन हो-
    जौहरी बाजार व चौडा रास्ता में अभी दो पहिया वाहनों की पार्किंग एक ही लेन में हो रही है। व्यापारियों की मांग है कि इन वाहनों की पार्किंग दो लेन में होनी चाहिए। जिससे ज्यादा वाहन खडे किए जा सकें। डीसीपी ट्रैफिक ने संभावना तलाशने का आश्वासन दिया है।
    शुल्क पर एक नजर
    चौपहिया वाहन के लिए-पहले घंटे-10 रुपए, दसरे घंटे-20 रुपए।
    दुपहिया वाहन-पहले घंटे निशुल्क, दूसरे घंटे से 5 रुपए।

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  2. बदल जाएगी परकोटा की सूरत

    जयपुर में परकोटा की सूरत बदलने के लिए कई योजनाओं पर अमल किया जा रहा है। परकोटा को भीडभाड और यातायात दबाव से निजात दिलाने के लिए इलैक्ट्रीक बस रिक्शा चलाने, कपड़ा, मूर्तियां, ज्वैलरी सहित अन्य व्यवारियों के लिए चाहरदीवारी के पास ही वैकल्पिक बाजार विकसित करने, चंडीगढ की तर्ज पर फुटकर व्यापारियों के लिए रेडी मार्केट विकसित करने सहित कई जरूरतों पर गुरूवार को जेडीए में मंथन हुआ।
    अरबन मास ट्रांजिट कंपनी की ओर से यहां ड्राफ्ट प्लान का प्रस्तुतिकरण किया गया था। इसमें शहर के बाजारों को सप्ताह के अलग अलग दिन बंद रखने का प्रस्ताव भी आया था लेकिन पिछले दिनों व्यापारियों के विरोध के चलते इस पर चर्चा नहीं हो सकी। इस बीच अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कंपनी को निर्देश दिया कि किसी भी बड़े प्लान की योजना करने से पहले व्यापारियों, फुटकर व्यापारियों, ऑटोरिक्शा चालकों और स्थानीय प्रतिनिधियों से बातचीत कर ली जाए।

    बैठक में ये थे शामिल-

    बैठक में महापौर ज्योति खंडेलवाल, जेडीएआयुक्त कुलदीप राकां, मुख्य नगर नियोजक एन के खरे, नगर निगम सीईओ जगरूप सिंह यादव, डीसीपी ट्रैफिक लता मनोज कुमार आदि शामिल थे।

    इन प्रस्तावों पर हुई चर्चा-

    -साइकिल रिक्शा व ऑटो रिक्शा अलग अलग जगह शिफ्ट हों ताकि सभी जगह से यातायात के साधन सुगमता से मिलें।
    -चारदीवारी में जयपुर स्थापना के समय से संचालित हो रहे पुराने व्यापारों को शहर के बाहर शिफ्ट किया जाए। व्यापरियों को वैकल्पिक बाजार भी उलब्ध कराए जाएं।
    -चंडीगढ की तर्ज पर फुटकर व्यापारियों के लिए रेडी मार्केट विकसित किया जाए। चौपड़ों के खंदों को वेंडरजोन बनाया जाए। फुटकर व्यापारियों का डेटा तैयार किया जाए।
    -हिंद होटल के पीछे दुपहिया वाहन, चौगान स्टेडियम में भूमिगत पार्किंग और रामलीला मैदान में पार्किंग प्रस्ताव भी दिया गया।

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