ग्रामीण पर्यटन : राजस्थान

ग्रामीण पर्यटन : राजस्थान (Rural Tourism : Rajasthan)

Rural-Tourism

तमाम आधुनिकताओं और हर क्षेत्र में विकास के बावजूत यह सत्य है असली राजस्थान आज भी बड़े ही सादगीपूर्ण ढंग से गांवों में ही रहता है। शहरी इलाकों में सातवीं आठवीं मंजिल पर रहने वाले लोग न धरती का सुख जानते हैं न खुले आसमान का। लेकिन गांवों में हरे भरे खेतों के बीच वृक्षों के झुरमुट और ठंडी छांवों से घिरा कच्ची मिट्टी एवं छान का घर, जिसके अहाते में किसी नीम की छांह में सुस्ताते मवेशी और खटिया पर घर के मुखिया की कल्पना किसी को भी अपनी ओर खींच सकती है। शहरी भाषा में यह गांव का गंवारूपन ही सही, लेकिन जीवन का असली आनंद यही है।

गांवों के खुले वातावरण में वह है, जो निश्चित रूप से शहरों में नहीं मिल सकता। मवेशियों के गले में बंधी घंटी का बार बार बजना, गायों का रंभाना, महिलाओं का ईंधन तोड़कर लौटना, झाड़ियों में चिड़ियाओं का चहकना और ऊंटगाड़ियों की चरमराती चाल गावों के आम परिदृश्य हैं।
इस सादगी के अनभ्यस्त लोगों के लिए गांव आज भी अपनी सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं की ओर लौटने के द्वार हैं। ग्रामीण पर्यटन प्रकृति आधारित पर्यटन का एक ऐसा रूप है जिसमें ग्रामीण इलाकों में ग्राम्य जीवन, ग्राम्य संस्कृति, कला और हैरिटेज से रूबरू कराया जाता है। यह भी सच है ग्रामीण पर्यटन से ग्रामीणों के सामाजिक और आर्थिक विकास में मदद मिलती है। लेकिन वास्तव में ग्रामीण पर्यटन से जुड़कर शहरी लोग कहीं न कहीं इस भागदौड़ के जीवन से  कुछ देर के लिए छुटकारा पाते हैं और गांवों में रम जाते हैं। ग्रामीण पर्यटन गांवों और शहरों के बीच एक सेतु का कार्य करता है।

ग्रामीण पर्यटन में पर्यटन के बहुमुखी रूप शामिल हैं। जैसे- कृषि पर्यटन, प्रकृति पर्यटन, संस्कृति पर्यटन आदि। पारंपरिक पर्यटन के विपरीत इस पर्यटन में एक पर्यटक शहरों की ऊंची अट्टालिकाओं और फाइव-स्टार सुविधाओं को छोड़कर गांवों के हरे भरे रास्ते पर निकल पड़ता है। ग्रामीण पर्यटन में मौसम आधारित उत्सव, पर्व, मेले, तीज-त्योंहार, स्थानीय विरासत, संस्कृति, उल्लास, खेल, परंपराएं, रहनसहन, खानपान, वेशभूषा और लोकाचार सभी को जोड़ दिया गया है। आज वास्तव में इन सबके संरक्षण की जरूरत है। क्योंकि रोजगार के अभाव में गांवों के लोग शहरों की ओर भाग रहे हैं और अपना स्वर्ग जैसा जीवन छोड़कर शहरों में मजदूर बन जाने को मजबूर हो रहे हैं। इसलिए ग्रामीण पर्यटन न केवल पर्यटन का वास्तविक आनंद महसूस करा सकता है बल्कि ग्रामीण संस्कृति को बचाने में भी मदद कर सकता है। इसे बढावा मिलना चाहिए।

भारत में प्राचीनकाल से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है और वर्तमान जनसंख्या का 70 फीसदी हिस्सा अभी भी गांवों में निवास करता है। ग्रामीण पर्यटन आर्थिक दृष्टि से गांवों को आत्मनिर्भर बनाने में फायदेमंद हो सकता है। यह सच है कि भारत में अभी ग्रामीण पर्यटन विकसित नहीं हुआ है। जबकि विदेशों में पर्यटन के माध्यम से गांवों का विकास किया जा रहा है। ग्रामीण पर्यटन सरकार के लिए भी उपयोगी साबित होगा क्योंकि ग्राम्य पर्यटन के लिए किसी भी तरह के प्रशिक्षण की जरूरत नहीं है। न सब्सिडी देनी है और न ही किसी विशाल भवन का निर्माण कराना है। ग्रामीण पर्यटन से गरीब ग्रामीणों, विशेषकर पिछड़े और शोषित समाज को इससे बहुत लाभ होने की संभावनाएं हैं। हाथ से कलात्मक चीजें बुनने और निर्मित करने वाले इस समाज को विपणन सुविधाएं नसीब हो सकती हैं और उनका काम अच्छा चल सकता है।

अगर हम सच्चे दिल से भारत को महसूस करना चाहते हैं तो हमें एक विकल्प के रूप में ग्रामीण पर्यटन को अपनाना ही चाहिए। शहरी जीवन की तेज रफ्तार में आज कहीं न कहीं थोड़े विश्राम, थोड़े आराम की जरूरत है। गांवों का उल्लास हमें तरोताजा कर सकता है। आदिवासियों के रोचक खेल, कुश्ती और दंगल, ऊंटों की यात्रा, लोक संगीत, नृत्य का मस्ती भरा माहौल साहसऔर रोमांच पैदा करता है। इस लिहाज से जयपुर में ग्रामीण पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। ग्रामीण पर्यटन के कई फायदे हैं। इससे स्थानीय गुणवत्ता में सुधार कर ग्राम्य जनजीवन का स्तर ऊंचा उठाया जा सकता है। स्थानीय संस्कृति, लोकाचार, परंपराओं और स्थानीय ऐतिहासिक स्थलों के स्थानीय संरक्षण को बढावा दिया जा सकता है।

ग्राम्य जीवन शैली शहरी तनावपूर्व जीवन से कहीं श्रेष्ठ है। ग्रामीय पर्यटन कुछ टूर पैकेज उपलब्ध करा सकता है जिससे शहरी लोगों को राजस्थान को नजदीक से देखने का मौका मिलेगा। ग्रामीण लोग अपनी आवश्यकताओं को बहुत सीमित रखते हैं। वे खेती और मवेशियों पर निर्भ र होते हैं। उनकी असली पूंजी खेत-खलिहान और मवेशी ही होते हैं। मनोरंजन के सीमित साधनों के कारण वे अनने गीत संगीत, सभ्यता, संस्कार और परंपराओं से बेहद प्यार करते हैं।

यही कारण है कि कलाएं अभी तक जीवित हैं। गांवों के लोग जीवन की कलात्मकता और उपयोगिता को बखूबी समझते हैं। उदाहरण के लिए मान लीजिए गांव का मोची मोहना गांव में रहकर खूबसूरत मोजड़ी यानि कि जूतियां बनाता है। वह बहुत ही कम मुनाफे पर उन्हें बेचता है और यही मोजड़ियां जयपुर के बाजार में आकर विदेशियों की पसंद बन जाती हैं। अगर ग्रामीण पर्यटन को बढावा दिया जाए तो देशी विदेशी मेहमान मोहना के गांव जाएंगे। वे मोजड़ी को बनता हुआ देखेंगे और सीधे उसी से वे मोजड़ियां खरीदेंगे। ऐसे कई मोहना हैं जो गांवों में दस्तकारी, हस्तशिल्प और हथकरघा के कामों में जुटे हैं, ग्रामीण पर्यटन द्वारा उन्हें प्रमोट किया जा सकता है। 

जयपुर के आस-पास कई गांवों में कालीन बुनकर सुंदर कालीन बनाने का काम करते हैं। धीरे धीरे उनका काम खत्म हो रहा है क्योंकि परंपरागत विधियों से वे कई महीनों में एक कालीन तैयार करते हैं और बाजार में मशीन द्वारा निर्मित कारपेट बहुत ही कम कीमतों पर उपलब्ध हो जाते हैं। यदि पर्यटन गांवों में जाकर इनकी बुनाई देखें तो न केवल उन्हें पारंपरिक उद्यमों के बारे में विशेष जानकारी मिलेगी बल्कि वे यह देखकर हैरान रह जाएंगे कि एक कालीन बुनने में एक साथ दर्जनभर लोग साथ बैठते हैं और गीत गाते हुए कालीन बुनते हैं। ग्राम्य पर्यटन जैसी पहल से ग्रामीण बुनकारों को काम भी मिलेगा और प्रोत्साहन भी। निश्चय ही, तेजी से घूमते चाक पर कुंहार द्वारा बनाई जा रही कलाकृतियों को करीब से देखना और विभिन्न वस्तुएं तैयार होते देखना भी एक सुखद अनुभव होगा। लेकिन जब आप गांव की शादी समारोह में महिलाओं को इसी चाक की पूजा करते हुए देखेंगे तो पाएंगे ग्रामीणों ने अपने रोजगार को भी कितना ऊंचा दर्जा दे रखा है, चाहे वे इससे कोई विशेष आर्थिक लाभ न कमा रहे हों।

कभी अपनी स्पोर्ट बाइक या तेज रफ्तार कार से निकलकर गांव में टीलों और रेतीले धोरों के बीच ऊंट गाड़ी की सवारी करके देखिए, आप अपना हर सुहाना सफर भूल जाएंगे। या फिर ऊंट की पीठ पैर बैठकर रेगिस्तानी गांव का कोई मेला देखकर आईये, आप ग्रामीण पर्यटन का मूल्य और महत्व समझ जाएंगे। कभी झोंपड़ियों के किसी झुंड के बीच एक चौक पर अनाज साफ करती गुनगुनाती महिलाओं की प्रक्रिया देखें, या पत्थर की चक्की में अनाज पीसना, या मथनी ने दही के बड़े मटके में दही बिलौना या फिर चूल्हे पर लकड़ियों को सुलगाते हुए खाना पकाना। कभी किसी शाम चारपाई पर बैठकर इन्हीं गांवों की मोटी रोटियों, छाछ और लहसुन की चटनी का स्वाद परखिए, आप फाइव स्टार होटलों की भारी भरकम थाली भूल जाएंगे।

हमारा दायित्व बनता है कि हम हमारी भावी पीढ़ियों के लिए ये बरगद के वृक्षों की छांव, कूएं, बावड़ियां, गांव के मंदिर, खेत, खलिहान, गीत गाते बुनकर, गुनगुनाती महिलाएं, चाकी और चूल्हे का भोजन, ऊंट की सवारी और गांव के बाहर किसी मंदिर के नजदीक लगने वाला मेला बचाकर रखें। हम ग्रामीण पर्यटन से यह दौलत बचा सकते हैं।

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Our company deals with "Managing Reputations." We develop and research on Online Communication systems to understand and support clients, as well as try to influence their opinion and behavior. We own, several websites, which includes: Travel Portals: Jaipur.org, Pinkcity.com, RajasthanPlus.com and much more Oline Visitor's Tracking and Communication System: Chatwoo.com Hosting Review and Recommender Systems: SiteGeek.com Technology Magazines: Ananova.com Hosting Services: Cpwebhosting.com We offer our services, to businesses and voluntary organizations. Our core skills are in developing and maintaining goodwill and understanding between an organization and its public. We also conduct research to find out the concerns and expectations of an organization's stakeholders. Our role is varied and will depend on the organization and sector.

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