जयपुर और दुनिया के खूबसूरत शहर

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जयपुर दुनिया के सबसे खूबसूरत शहरों में शुमार किया जाता है। जयपुर की खास बात यह है कि यहां दुनिया के तमाम खूबसूरत शहरों की छवि देखी जा सकती है। जयपुर ऐतिहासिक शहर भी तो सांस्कृतिक शहर भी, यह आस्था की नगरी भी है तो मॉल्स का शहर भी, यहां इमारतों के जंगल भी हैं और खूबसूरत उद्यान भी। अपनी अनेकताओं के कारण जयपुर दुनिया के अनेक शहरों से मेल खाता है। आइये, जयपुर के इन विविध रूपों की तुलना करें दुनिया के खूबसूरत शहरों से-

rome-&-jaipur

जयपुर और रोम का इतिहासप्रेम

रोम दुनिया का सबसे शानदार ऐतिहासिक शहर है। हालांकि इतिहास के मामले में जयपुर रोम के पौत्र की तरह है लेकिन ऐतिहासिक तथ्यों, महलों, इमारतों और अपने इतिहास के रखरखाव के मामले में यह रोम के नक्शे कदम पर है। रोम के म्यूजियम, ऐतिहासिक इमारतें, सड़कों के बच विशाल स्टेच्यू, प्राचीन बाजार और गलियां, उद्यान आदि मशहूर हैं। इसी तरह जयपुर में भी बहुत सी इमारतें, प्राचीन बाजार और स्टेच्यू रोम का एहसास दिलाते हैं। जयपुर के नगर निगम की इमारत को रोम के सदियों पुराने विश्वप्रसिद्ध स्टेडियम की तर्ज पर ही बनाया गया है। 

जयपुर और वेटिकन सिटी की आस्था

वेटिकन सिटी को पोप का शहर कहा जाता है। यह आस्था की नगरी है। जयपुर को भी इसकी आस्था के कारण ’छोटी काशी के नाम से जाना जाता है। एक विशेष बात ये कि वेटिकन  सिटी का पीटर्स स्क्वायर स्थल और जयपुर का जलेब चौक मिलते जुलते हैं। वेटिकन सिटी को पोप के प्रति आस्था के कारण धार्मिक नगरी माना जाता है जबकि जयपुर को विभिन्न धर्मों के ऐतिहासिक धर्मस्थलों के कारण धार्मिक नगरी माना जाता है। वेटिकन सिटी के नागरिकों की तरह जयपुर के लोगों में भी आस्था का ज्वार दिखाई देता है।

जयपुर और बाली का जलमहल

बाली इंडोनेशिया का खूबसूरत शहर है। बाली के पर्यटन की खास बात है यहां का प्राकृतिक सौंदर्य। जयपुर में भी चारों ओर हरीभरी पहाड़ियां और उनके बीच खूबसूरत महल इसे एक प्राकृतिक शहर बनाते हैं। जयपुर में आमेर रोड पर मानसागर झील के बीच स्थित जलमहल और बाली के ’वॉटर विला’ और ’बाली विलाज़’  के बीच बहुत सी समानताएं देखने को मिलती हैं। दोनो के वॉटर पैलेस झील के बीच स्थित हैं। चारों ओर हरी भरी पहाड़ियां हैं। दोनो जगह नौकाओं में बैठकर जाना होता है। जयपुर और बाली के वॉटर पैलेस में ऐतिहासिकता का अंतर है। जयपुर का जलमहल एक ऐतिहासिक इमारत है जिसे रिसोर्ट के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाता जबकि बाली के ’वॉटर पैलेस’ को रिसोर्ट की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

जयपुर और चीन की दीवार

चीन और जयपुर दोनो में एक समानता अपने इतिहास से प्रेम करना और उसे संजोकर रखना है। चीन की दीवार विश्वप्रसिद्ध है जिसे चीन के पश्चिमी मरूस्थल को रोकने के लिए बनाया गया था। जयपुर के ऐतिहासिक उपनगर आमेर में भी प्राचीन दीवारें दिखाई देती हैं। ये दीवारें आमेर की पहाड़ियों तक फैली हुई हैं जिनमें बीच बीच में वॉच टॉवर भी बनाए गए हैं। चीन की दीवार पर भी वॉच टॉवर बने हुए हैं। जयपुर की ये प्राचीर आमेर से जयगढ और नाहरगढ से होती हुई पुरानी बस्ती तक फैली हुई है। लगभग 11 किमी लंबी यह प्राचीर चीन की दीवार जितनी विशाल तो नहीं लेकिन मायने जरूर रखती है। जयपुर का गुलाबी शहर भी इन्हीं दीवारों से घिरा हुआ है। जिनमें सात दरवाजे बने हुए हैं। इन्हें परकोटा कहा जाता है।

जयपुर और विक्टोरिया के उद्यान

विक्टोरिया कनाड़ा में ब्रिटिश कोलंबिया का शहर है। जयपुर और विक्टोरिया दोनों शहरों की खास बात ये है कि इन्हें ’सिटी ऑफ गार्डंस’ कहा जाता है। जयपुर में जहां रामनिवास बाग, परियों का बाग, जयनिवास बाग, कनक वृंदावन, मुगल गार्डन, विद्याधर का बाग, सिसोदिया रानी का बाग, जवाहर सर्किल गार्डन और सेंट्रल पार्क जैसे उद्यान हैं वहीं विक्टोरिया में भी सनकेन गार्डन, विक्टोरिया गार्डन, बेकन हिल पार्क, थंडरबर्ड पार्क, पैसेफिक अंडरसी गार्डन, विक्टोरिया बटरफ्लाई गार्डन, फोर्ट रोड हिल गार्डन आदि प्रमुख उद्यान हैं। दोनों ही शहरों के खूबसूरत उद्यान इन्हें ’बगीचों का शहर’ बनाते हैं।

जयपुर और पेरिस का फैशन

जयपुर को भारत का पेरिस भी कहा जाता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। जयपुर की आधुनिक इमारतें, मॉल्स, सिटी ट्रासपोर्टेशन, चमचमाती काली सड़कें और लोगों का रहन सहन आदि आदि। लेकिन वास्तविक तौर पर जयपुर और पेरिस की तुलना फैशन के मामले में की जाती है। दोनो ही शहर दुनिया के फैशन आईकन हैं। जयपुर की ज्वैलरी दुनिया के ज्वैलरी डिजायनर्स का मार्गदर्शन करती है तो पेरिस का पहनावा दुनिया को परिधान फैशन से रूबरू कराता है। जयपुर की ज्वैलरी ने दुनिया के कोने कोने में धूम मचाई है। लेकिन ऐसा नहीं है कि पहनावे के मामले में जयपुर पीछे है। जयपुर ने अपने परंपरागत परिधानों को दुनिया में मशहूर कर दिया है। वास्तव में जयपुर और पेरिस दोनो ही ऐसे शहर हैं जिनके फैशन की कायल पूरी दुनिया है।

जयपुर और सीरिया की गलियां

जयपुर के पुराने बाजार और गलियां पर्यटकों को बहुत आकर्षित करते हैं। सीरिया के पुराने बाजार भी बारहवीं से सोलहवीं सदी के हैं। इन दोनों शहरों की ऐतिहासिक गलियां बहुत ही खूबसूरत हैं। बरामदे युक्त बाजार भी एक जैसे हैं। लेकिन अंतर है जनसंख्या का। सीरिया की गलियों और बाजारों में जयपुर की तरह भीड़भाड़ दिखाई नहीं देती। इसलिए जयपुर की गलियों की तुलना में सीरिया की गलियां देखना ज्यादा सुखद होता है। सीरिया का अल-मदीना-सौक़ जयपुर के एमआई रोड से काफी मिलता जुलता है। वहीं सीरिया की बवाबेत-अल-यास्मीन, बाब-अल फराज, अरगुन अल कामिली आदि गलियां, बराबदे और चौक जयपुर के पुराने बाजारों और गलियों से बहुत मेल खाते हैं।

जयपुर और आयरलैंड के पहाड़ी दुर्ग

जिस प्रकार जयपुर में नाहरगढ और जयगढ़ दुर्ग पहाड़ी पर शान से खड़े दिखाई देते हैं, उसी तरह आयरलैंड के ब्रांज एज और आयरन एज पहाड़ी दुर्ग भी अपनी भव्यता के कारण जाने जाते हैं। जयपुर में नाहरगढ, जयगढ, आमेर महल, आमा गढ, मोती गढ, गढ गणेश, गलता का सूर्य मंदिर आदि पहाड़ियों पर स्थित दुर्ग और धार्मिक स्थल हैं। इसी तरह आयरलैंड में भी पहाड़ी दुर्गों और पहाड़ की चोटी पर स्थित स्मारकों की कमी नहीं है। आयरलैंड के दुर्ग भी इतने भव्य और विशाल हैं कि उनके अंदर खेती की जाती थी। आयरलैंड में छोटे बड़े 40 पहाड़ी दुर्ग हैं।

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2 comments

  1. जयपुर काउंटर मैग्नेट क्षेत्र घोषित होगा

    जयपुर काउंटर मैग्नेट क्षेत्र और भरतपुर एनसीआार में शामिल होने से सिर्फ एक कदम दूर है। राजस्थान के इन दोनो प्रस्तावों पर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की एब जुलाई को होने वाली बैठक में अंतिम फैसला होगा। बोर्ड की प्लानिंग कमेटी की नई दिल्ली में मंगलवार को हुई बैठक में इसे हरी झंडी मिली। एनसीआर में जनसंख्या दबाव कम करने के लिए इसके चारों ओर के आठ शहरों को काउंटर मैग्नेट क्षेत्र घोषित किया गया। यहां बेहतर जीवन के लिए आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। दोनो शहरों के आधारभूत ढांचे के तेजी से विकास के लिए आसानी से अनुदान मिलेगा। एडीबी व केएफडब्लू जर्मनी आदि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से कम ब्याय दर पर ऋण मिलेगा।

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  2. जयपुर में फिर ’टिफिन बम’ का खौफ

    जयपुर के परकोटा क्षेत्र में एक बार फिर टिफिन बम की अफवाह से खौफ फैल गया। घटना के मुताबिक चांदपोल हनुमान व गणेश मंदिर के सामने मंगलवार सुबह थैले में टिफिन टांगे खडे़ दो साइकिल सवारों की हरकत से श्रद्धालुओं को शक हुआ। उन्होंने दोनो से पूछताछ की तो दोनो साइकिल समेत भाग खड़े हुए। घटना की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने यहां और परकोटा क्षेत्र के कई स्थानों पर गहन जांच कराई। लेकिन जांच में यहां कुछ नहीं मिला। सर्च अभियान में पुलिस अफसर, एटीएस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड पहुंचे। तीन घंटे तक तलाशी अभियान चलाया गया। मंदिर परिसरों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए लेकिन संदिग्ध नहीं मिले। शहर में विशेष अलर्ट जारी किया गया है। उल्लेखनीय है कि चांदपोल हनुमान मंदिर और परकोटा के अन्य इलाकों में 13 मई 2008 को सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। जिनमें 70 जानें गई थी।

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