खेतड़ी महल : झुंझुनूं

खेतड़ी महल : झुंझुनूं (Khetri Mahal, Jhunjhunu)

Khetri-Mahal,-Jhunjhunu

झुंझुनू राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र का मुख्य जिला है। यह इस क्षेत्र का मुख्यालय भी है। झुंझुनू से लगभग 180 किलोमीटर की दूरी पर है। यह देश की राजधानी दिल्ली से 245 किमी की दूरी पर है। झुंझुनूं की स्थापना 15 वीं सदी में खेमखाणी नवाबों ने की थी। खेतड़ी झुंझुनूं सीकर इलाके का प्रमुख्य शहर है। खेतड़ी और झुंझुनूं शेखावत राजपूतों के प्रमुख ठिकाने रहे हैं। वर्तमान में खेतड़ी की राष्ट्रीय पहचान तांबे की खानों के कारण है। खेतड़ी में राष्ट्रीय संयंत्र ’हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड’ भी इस शहर को अलग और समृद्ध पहचान देता है। खेतड़ी शहर अरावली की कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों के बीच बसा हुआ है।

खेतड़ी : इतिहास

खेतड़ी रियासत की स्थापना निरबान चौहान वंश के राजपूत शासक खेतसिंह निरबान ने की थी। उन्हीं के नाम पर इस शहर का नाम खेतड़ी रखा गया। लेकिन शीघ्र ही इस रियासत पर शेखावत राजपूतों ने कब्जा कर लिया और यह नगर महाराव सार्दुल सिंह ने अपने पुत्र ठाकुर किशनसिंह को ईनाम में दे दिया। खेतड़ी पंचपना रियासत का उपखंड था। क्षेत्र के राजा ठाकुर अजीत सिंह शेखावत एक वीर योद्धा और चतुर शासक थे। उन्होंने क्षेत्र में कई महलों, मंदिरों और किलों की स्थापना की। उल्लेखनीय है कि भारत के महान हिन्दू उपदेशक स्वामी विवेकानंद ठाकुर अजीत सिंह से प्रभावित थे और उनके गहरे मित्र भी थे। खेतड़ी में आज भी स्वामी विवेकानंद की विशाल मूर्ति और शिलालेख देखा जा सकता है। यह खेतड़ी के प्रमुख स्मारकों में से एक है। ठाकुर सरदार सिंह खेतड़ी के आखिरी राजा थे। उनके राज के बाद देश में लोकतंत्र की स्थापना हुई।

नेहरू परिवार से भी खेतड़ी नरेशों के संबंध अच्छे रहे। खेतड़ी राजपरिवार के नेहरू परिवार से दोस्ताना ताल्लुकात थे। खेतड़ी नरेश को जवाहरलाल नेहरू के परिवार में सदस्य की भांति दर्जा मिला हुआ था। जवाहर लाल नेहरू के चाचा नंदलाल नेहरू को खेतड़ी दरबार में प्रमुख ओहदा भी दिया गया था। वे नरेश के करीबी मंत्रियों में शामिल थे। जवाहर लाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू भी अपने जीवन के प्रारंभिक दौर में खेतड़ी रहे थे।

खेतड़ी दुर्ग

खेतड़ी के करिश्माई प्रजापालक राजा अजीत सिंह शेखावत ने यहां एक दुर्ग का निर्माण भी कराया था। अरावली की एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस भव्य दुर्ग से खेतड़ी शहर का विहंगम नजारा देखा जा सकता है। दुर्ग के भित्तिचित्र लुप्तप्राय हो गए हैं लेकिन दुर्ग में मूर्तिकला को देखकर यहां के स्थापत्य की समृद्धि का अंदाजा लगाया जा सकता है। खेतड़ी दुर्ग का भ्रमण करना एक सुखद अनुभूति होती है। इस दुर्ग में संगमरमर पत्थर से बने छोटे छोटे मंदिर दर्शनीय हैं।

खेतड़ी महल की वास्तुकला

खेतड़ी महल शेखावाटी क्षेत्र की पारंपरिक स्थापत्य और भवन निर्माण कला का सबसे खूबसूरत उदाहरण है। इस महल को खेतड़ी का हवामहल भी कहा जाता है। इस महल का निर्माण 1770 में खेतड़ी के तत्कालीन ठाकुर राजा भोपाल सिंह ने कराया था। यह महल अपने संकीर्ण गलियारों के कारण विख्यात है। ये कीर्ण गलियारे भूलभुलैया जैसे लगते हैं। यह आश्चर्य की बात है कि महल में ज्यादा खिड़कियां या दरवाजे नहीं है फिर भी इसे खेतड़ी का हवामहल कहा गया है। वर्तमान में खेतड़ी महल उपेक्षित है और सुनसान रहता है। उपेक्षा का शिकार होने बावजूद आज भी महल की बेहतरीन स्थापत्य, निर्माण कला, गलियारे, बरामदे, दीवारें और छतें दर्शनीय हैं और अपने मूल रूप में स्थित हैं। यह खूबसूरत महल भोपालगढ़ के रूप में भी जाना जाता है और रघुनाथ मंदिर के कारण भी महल में पर्यटन की संभावनाएं हैं। अपने खूबसूरत नैसर्गिक दृश्यों से यह महल सभी को प्रभावित करता है।

खेतड़ी का हवामहल

खेतड़ी महल में हवा की निर्बाध धारा बनाए रखने के लिए यहां का ढांचा बहुत ही अद्वितीय तरीके से बनाया गया है। गर्मियों में भीषण धूप और गर्मी से बचने के लिए कई सघन इमारतों को निर्माण किया गया है किसी भी तरह से बहती हुई हवा की अवरोधक नहीं बनतीं। यही कारण है कि इस महल को हवामहल भी कहा जाता है। महल में जहां तक हो सका स्तंभों का सहारा लिया गया है और दीवारों को कम रखा गया। इससे महल के हर हिस्से में निर्बाध रूप से हवा की ताजगी और ठंडक महसूस की जाती थी। महल को विभिन्न स्तरों पर बनाने के बजाए एक सीधी सरल श्रंख्ला में बनाया गया। इस भव्य समानुपातिक प्रणाली से निर्मित होने के कारण सभी मेहराब भी एक श्रंख्ला के रूप में ही दिखाई देते हैं।
इसके अलावा महल में एक विशाल सभाकक्ष भी है जिसकी दीवारों पर प्राकृतिक रंगों से सुंदर चित्र बनाए गए थे। लेकिन इन चित्रों पर समय की गर्त साफ देखी जा सकती है और कहीं कहीं से ये लुप्त भी हो गए हैं। सभाकक्ष के साथ दो छोटी कोठरियां बनी हुई हैं। अलंकृत मेहराबों और सुंदर कारीगरी युक्त निर्माण को देखकर पर्यटक अभिभूत हो जाते हैं। यह देखना वाकई एक अलग अनुभव है कि महल के सभी कक्ष आपस में स्तंभों की बनावट के द्वारा ही एक दूसरे से जुड़े हैं और खिड़की दरवाजों का प्रयोग नगण्य रहा है। कहीं अन्यत्र इस तरह का अनिर्माण नहीं देखा गया है। शेखावाटी जैसे शुष्क प्रदेश में इतनी सुंदर कला वाकई दिल की गहराईयों में बस जाती है।
खेतड़ी महल की बनावट और स्थापत्य इसलिए भी अन्य महलों से अलग है क्योंकि संपूर्ण महल एक रैंपनुमा धरातल से जुड़ा हुआ है। इसका कारण ठाकुरों को घोड़ों समेत महल के

अनोखे रैंप

हर हिस्से का दौरा करने की सुविधा को ध्यान में रखकर किया गया होगा। यहां तक कि महल की छत तक जाने के लिए इन रैंप का प्रयोग किया जाता था और शहर से आने वाला घुड़सवार यदि घोड़े सहित महल के सर्वोच्च स्तर या छत पर जाना चाहे तो वह जा सकता था। इस तरह के अनोखे रैंप महलों में देखने को मिलते हैं लेकिन इस तरह पूरा महल ही रैंप से जुड़ा हो यह अनोखी बात है।

खेतड़ी का महल अपने समय के बने तमाम महलों से अलग और अनोखा है। लेकिन यह दुर्भाग्य है कि सरकारी और प्रशासनिक उपेक्षाओं के कारण अब यह महल अपनी पहचान खोता जा रहा है। इतने खूबसूरत स्थापत्य को बचाने के प्रयास किए जाने चाहिए। धीरे धीरे खंडहर में तब्दील होता यह महल दयनीयता से सार संभाल की मांग कर रहा है। खेतड़ी महल भारतीय पर्यटन उद्योग की बड़ी संपत्ति सबित हो सकता है। इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

Advertisements

About aimectimes

Our company deals with "Managing Reputations." We develop and research on Online Communication systems to understand and support clients, as well as try to influence their opinion and behavior. We own, several websites, which includes: Travel Portals: Jaipur.org, Pinkcity.com, RajasthanPlus.com and much more Oline Visitor's Tracking and Communication System: Chatwoo.com Hosting Review and Recommender Systems: SiteGeek.com Technology Magazines: Ananova.com Hosting Services: Cpwebhosting.com We offer our services, to businesses and voluntary organizations. Our core skills are in developing and maintaining goodwill and understanding between an organization and its public. We also conduct research to find out the concerns and expectations of an organization's stakeholders. Our role is varied and will depend on the organization and sector.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.