मीडिया की संजीवनी है मानवीय संवेदना- प्रो बिजारणिया

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होली का हुल्लास में काव्य रंगों की हुई बौछार      

जयपुर 

ईद होली से एक हो जाये, आओ इतने करीब हो जाएं।
रंग मिटने न पाए किसा का भी, सांस जितने करीब हो जाएं।

ये पंक्तियां ज्योहिं सरस संकुल ऑडिटोरियम में जीनत कैफी ने पढ़ीं, माहौल खुशमिज़ाज़ बन गया। दिल अब बच्चों की तरह मचलता क्यू नहीं से जहां युवा फिल्मकार अविनाश त्रिपाठी ने खोते जा रहे बचपन को तलाश करने की कोशिश की, वहीँ सुश्री प्रभात दीक्षित ने मेरा घर कमरों-कमरों में सिमट कर रह गया से दरकते रिश्तों के दर्द को बताया। मौका था सामाजिक सरोकारों से सम्बद्ध अग्रणी संस्था परिवर्तन संस्थान और आरसीडीएफ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मीडिया और पीआर प्रोफेशनल का काव्य पाठ कार्यक्रम होली का हुल्लास।
कार्यक्रम में 30 मीडिया और पब्लिक रिलेशन्स प्रोफेशनल ने काव्य पाठ किया। पत्रकारिता से वरिष्ठ पत्रकार ईशमधु तलवार, अनिल लोढ़ा, ज़ीनत कैफ़ी, वाईएन शर्मा, डॉ. संजय सक्सेना, योगी योगेन्द्र, अमित बैजनाथ गर्ग, आरजे रविन्द्र, अंशु हर्ष, किशनवीर यादव, डॉ कृपाशंकर शर्मा अचूक और जनसम्पर्क क्षेत्र से राधेश्याम कोली, गजाधर भरत, धर्मिता चौधरी, मीना माथुर, डॉ. मधुकर डोरिया, आत्माराम सिंघल, एस के शर्मा और डॉ. संजय मिश्रा ने अपनी स्वरचित कविताओं से मानवीय त्रास और विडंबनाओं का चित्र खींचा तो किसी ने चुटीले व्यंग्यों के जरिए समाज-जीवन और राजनीती पर प्रहार भी किये। इसी तरह जनसंचार शिक्षण से फ़िल्म विशेषज्ञ अविनाश स्वरुप त्रिपाठी, डॉ. नीरज खत्री और सुश्री प्रभात दीक्षित ने अपनी काव्य रचनाएँ प्रस्तुत की।
कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि डीडी राजस्थान के निदेशक रमेश शर्मा ने भूख और गरीबी के तांडव को, तो प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो की क्षेत्रीय निदेशक प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने वर्चुअल दुनिया में खोते जा रहे इनसान की जिंदगी के पहलुओं को अपनी कविता में बयां किया। इस अवसर पर महाराजा गंगासिंह यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर बीएस बिजारणिया ने कहा कि  मीडिया की असल संजीवनी है मानवीय संवेदना। इसलिए उसे डैडलाइन के दबावों में भी सहेजकर रखना होगा।
इस अवसर पर पूर्व सूचना और जनसम्पर्क निदेशक अमरसिंह राठौड़, संस्थान के संरक्षक मंडल के सदस्य विनोद गुप्ता, गजानंद अग्रवाल और समाजसेवी नागरमल अग्रवाल उपस्थित थे । संरक्षक राजेश शर्मा और अध्यक्ष एस के शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। सभी अतिथियों को पेन्सिल स्केच और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। कार्यक्रम का संचालन फाउंडर डॉ. संजय मिश्रा ने और धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष मनीष हूजा ने किया।
डॉ. संजय मिश्रा 
फाउंडर- परिवर्तन संस्थान 
98295 58069   
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