डॉ. रमेश कुमार रावत ने लिखी मीडिया फ्रीडम एवं डेमोक्रेसी पर विश्व की प्रथम सबसे बड़ी लाईव केस स्टेडी

केस स्टेडी का विषय है मीडिया फ्रीडम एंड डेमोक्रेसीः  ए केस स्टेडी ऑन जब तक काला तब तक तालाडॉ. रावत को मिला बेस्ट रिसर्च पेपर केस स्टेडी प्रजन्टेशन अवार्ड

World's First Largest Live Case Steady on Media Freedom and Democracyडॉ. रमेश कुमार रावत ने विश्व की प्रथम सबसे बड़ी लाईव केस स्टेडी मीडिया फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी विषय पर लिखी है। इस केस स्टेडी का विषय मीडिया फ्रीडम एंड डेमोक्रसी: ए केस स्टेडी ऑन जब तक काला तब तक ताला है । डॉ. रावत ने बतया कि उन्होंने इस केस स्टेडी को लिखने के लिए करीब एक साल का समय लिया है। उन्होंने इस केस स्टेडी को सितम्बर-अक्टूबर 2017 में आरंभ किया था एवं सितंबर- अक्टूबर 2018 में पूरी कर पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया। इस केस स्टेडी को 172 पृष्ठों में प्रकाशित किया गया है। इसमें 85 परिशिष्ट, 131 रेफरेंस, 211 साईटेशन शामिल किए गए है। इस केस स्टेडी में देश के जाने-माने 52 राजनीतिज्ञों, पत्रकारों, सेलिब्रेट्री, न्यायविद् एवं शिक्षाविद्ो सहित अनेक ख्यातनाम हस्तियों के विचारों को करीब 7 सारणियों में समायोजित किया गया है। इसी के साथ इस केस स्टेडी में 131 रेफरेंस के अतिरिक्त 155 अन्य रेफरेंसेज को 85 परिशिष्टों में समायोजित किया गया है। इस प्रकार इस केस  स्टेडी में कुल 286 रेफरेंस समायोजित है। इस केस स्टेडी को अनर्तराष्ट्रीय शोध मानकों के अनुरूप हर पेज पर रेफरेंस का प्रयोग करते हुए प्रोपर तरीके से साईटेशन लगाकर लिखा गया है। यह केस स्टेडी मीडिया प्रोफेशनल्स को मीडिया फ्रीडम एवं डेमोक्रसी से संबंधित मुद्दों को समझने में लाभदायक साबित होगी। इसके साथ ही यह मीडिया, लॉ, मैनेजमेंट एवं आर्ट के विद्यार्थियों को उनके पाठ्यक्रम में किसी न कसी रूप में लाभ पहुंचाने के साथ ही उनके अंदर वर्तमान समय में सरकार के नियम बनाने  एवं उनकी कार्यप्रणाली के तौर-तरीको से भी अवगत कराने का एक डाक्यूमेंट है। इसके साथ ही यह उनमें मीडिया की भूमिका को भी चरितार्थ करती है, कि किस प्रकार से एक गलत कानून को सिलसिलेवार कैम्पेयन चलाकर  जनसमर्थन से सरकार को वापस लेने के लिए बाध्य किया जा सकता है, जिसका श्रेय मीडिया एवं जनता दोनो को ही जाता है। इसके साथ ही ऐसे संवेदनशील मुद्दो पर न्यायपालिका की भी सराहनीय कार्यप्रणाली को भी यह केस स्टेडी दर्शाती है। यह केस स्टेडी राजनीतिज्ञों, सामाजिक प्रतिनिधियों, सेलीब्रेटी के विचारों को सामाहित करने के साथ ही इसके महत्व को और बढ़ा देती है। डॉ. रावत ने बताया कि यह केस स्टेडी सिलसिलेवार घटनाओं को स्टोरी टेलिंग के रूप में प्रजन्टेशन के साथ ही रिसर्च के काम्बीनेशन का एक नायाब वैश्विक उदाहरण है।

जयपुर जिले की चौमूं तहसील के अशोक विहार निवासी डॉ. रमेश कुमार रावत को उदयपुर में लोक संवाद संसथान एवं मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 27 से 29 सितंबर तक चौथी ऑल इंडिया मीडिया कांफ्रेस के समापन सत्र में बेस्ट केस स्टेडी पेपर प्रजन्टेशन अवार्ड से नवाजा गया। यह अवार्ड डॉ.  रमेश कुमार रावत को आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व प्रोफेसर, लोक संवाद संसथान के चैअरमेन एवं यूनिसेफ, न्यूयार्क के पूर्व निदेशक, प्रो. के. बी. कोठारी, वन वर्ल्ड फाउंडेशन इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर, राजीव टिक्कू, पॉवर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया के जी.एम. कम्यूनिकेशन, नरेश कुमार ने कांफ्रेस के तीसरे दिन समापन समारोह के अवसर पर दुप्ट्टा ओढ़ाकर प्रमाण पत्र देकर किया।
यह केस स्टेडी विश्व की प्रथम लाइ्रव सबसे बड़ी केस स्टेडी है। यह केस स्टेडी डॉ. रमेश कुमार रावत ने मीडिया फ्रीडम एंड डेमोक्रेसीः  ए केस स्टेडी ऑन जब तक काला तब तक ताला विषय पर लिखी है।

डॉ. रमेश कुमार रावत ने यह केस स्टेडी कांफ्रेस के दूसरे दिन आयोजित तकनीकी एवं सामानान्तर सत्र चैलेंजेज ऑफ द डिजिटल मीडिया इकोलॉजी विषयक सत्र में प्रस्तुत की। केस स्टेडी के प्रस्तुतिकरण पर तकनीकी वत्र के चैअरपर्सन प्रो. एम. एम, बाग्लादेश ने प्रशंसा की एवं इस सत्र के बेसट पेपर प्रजन्टेशन के लिए चयन किया।

डॉ. रावत ने इस केस स्टेडी में भारत के कई राज्यों में इस प्रकार के कानून लगाने एवं उन्हें हटाने, आपातकाल, राजस्थान में काले कानून को लगाने से इसे हटाने तक की सिलसिलेवार घटनाक्रमों को उल्लेखित किया है। इस केस स्टेडी में इस काले कानून को राजस्थान राज्य में लगाने से हटाने तक के समय में  राजनितिज्ञों, समाजसेवियों, मीडियाकर्मियों, न्यायविद्यो, प्राध्यापकों, उद्योगपतियों सहित आम जनता के हर वर्ग के विचारों को उल्लेखित किया गया है। यह केस स्टेडी मीडिया, लॉ एवं मैनेजमेंट के विद्यार्थियों के लिए उनके पाठ्यक्रमों में भी उपयोगी एवं कारगर साबित होगी। साथ ही यह केस स्टेडी वर्तमान समय में पत्रकारिता के मूल्यों को सुधारने में भी नए आयाम स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी। यह केस स्टेडी आमजन में पत्रकारिता के प्रति आस्था को और मजबूत करती है। साथ ही राजनीतिज्ञों को भविष्य में इस प्रकार के कानून नहीं लाने के लिए एक दबाव भी बनाती है। यह केस स्टेडी पत्रकारों को गलत के प्रति तब तक आवाज उठाने के लिए प्रेरित करती रहेगी जब तक वह उसे अंजाम तक नहीं पहुंचा दे। जिस प्रकार से गीता में श्री कृष्ण ने अर्जुन के युद्ध नहीं करने पर उन्हें युद्ध करने के लिए कहा ।

उसी प्रकार यदि कोई पत्रकार सिस्टम के खिलाफ लिखते समय थक जाए एवं डर जाए तो वह इसे पढ़कर वापस से नई उर्जा का संचार कर सकता है। साथ ही यह केस स्टेडी आपात काल के समय को तो याद दिलाती ही है इसके साथ ही राजस्थान में भी काले कानून के लागू होने पर जो आपात काल की भयावह स्थिति बन गई थी उस स्थति से राजस्थान पत्रिका समूह ने जिस प्राकर से प्रतिदिन सिलसिलेवार खबंरों का संकलन कर प्रकाषन किया वह काबिले तारिफ है। इस केस स्टेडी में सभी प्रकार के दस्तावेज एनक्सर के रूप में समाहित किए गए है। साथ ही इस काले कानून को लेकर खबरों के संकलन तथा प्रकाषित लेखों को रिसर्च के मापदंडों को रखते हुए प्रकाषित किया गया है। इस केस स्टेडी को लिखने में करीब एक साल का समय लिया गया एवं यह केस स्टेडी भारत ही नहीं अपितु विष्व की मीडिया फ्रीडम एवं डेमोक्रसी को लेकर लिखी गई प्रथम केस स्टेडी है। जो यह भी दर्षाती है कि भारत निरंतर विष्व इंडेक्स पर मीडिया फ्रीडम को लेकर क्यो पिछड़ रह है। यह केस स्टेडी भारत सरकार एवं विष्व के सभी देषों की सरकारों को भी मीडिया फ्रीडम एवं डेमोक्रसी पर अपनी रॉय बनाने एवं एक पॉलिसी बनाने में मददगार साबित होगी।

यह केस स्टेडी राजस्थान पत्रिका न्यूजपेपर के काले कानून के खिलाफ चलाए गए कैंपयन पर आधारित है। इस केस स्टेडी में कैम्पयेन के दौरान राजस्थान पत्रिका के मुख्य संपादक गुलाब कोठारी एवं अन्य प्रख्यात लेखको के लिखित लेखों की जानकारी दी गई है। राजस्थान पत्रिका समाचार पत्र ने इस मुद्दे को उठाया जिसकी चर्चा राष्ट्रीय एवं अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई। देश में प्रकाशित करीब एक लाख से भी अधिक समाचार पत्रों में राजस्थान पत्रिका एक मात्र समाचार पत्र रहा जिसने की काले कानून के खिलाफ लगातार करीब 6 महीने तक आवाज उठाई एवं सिलसिलेवार खबरों एवं अन्य सामग्री का विस्तृत रूप से प्रकाशन किया। इसके साथ ही राजस्थान पत्रिका ने इस दौरान यह भी निर्णय लिया कि जब तक सरकार इस कानून को वापस नहीं ले लेती तब तक मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम एवं उनसे जुड़े समाचारों का प्रकाशन नहीं करेंगे। इसी के साथ राजस्थान पत्रिका ने विश्व स्तर पर इतिहास रचते हुए मीडिया फ्रीडम एवं डेमोक्रेसी के खिलाफ सरकार के कानून को गलत ठहराते हुए अडिग रूप से खड़े रहकर समाज एवं जनता का साथ दिया। राजस्थान पत्रिका समाचार पत्रके इस कदम की देश एवं विश्व स्तर पर सराहना हुई। साथ ही राजनीतिज्ञ, फिल्मी सितारे, पत्रकार, शिक्षाविद्, सामाजिक संगठनों एवं संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी एक राय व्यक्त की। इसी के साथ ही सरकार को पीछे हटना पड़ा एवं काला कानून वापस ले लिया गया।

कांफ्रेस के चैअरमेन एवं लोक संवाद संस्थान के सचिव कल्याण सिंह कोठारी ने बातया कि इस कांफ्रेस में करीब तीन सो से अधिक रिसर्च स्कालर, मीडिया टीचर्स, मीडिया प्रोफेशनल्स एवं अन्य प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह प्रतिभागी देश के 18 राज्यों के तथा विश्व के विभिन्न देशों बाग्लादेश, हंगरी, यूएस, नेपाल, रोमानिया एवं सिंगापुर सहित अन्य देशों के 300 प्रतिनिधी थे। कांफ्रेस में 10 तकनीकी सत्रों में 150 से अधिक शोधार्थियों ने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए।

डॉ. रावत ने इन दस तकनीकी सत्रांे में आयोजित कए तकनीकी सत्र चैलेंजेज ऑफ द डिजीटल मीडिया इकॉलाजी में बेस्ट केस स्टेडी रिसर्च पेपर प्रजन्टेशन के लिए अवार्ड दिया गया। डॉ. रमेश कुमार रावत को यह अवार्ड दिए जाने पर कांफ्रेस के चैअरमेन, कल्याण सिहं कोठारी, को-चेअरमेन तथा एडमॉस यूनिवर्सिटी कोलकाता के प्रो-वाईस चांसलर, प्रो. उज्ज्वल के चौधरी एवं कांफॅेस के सेक्रेटी तथा मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के मॉस कम्यूनिकेशन के विभागाध्यक्ष, डॉ़. कुंजन आचार्य तथा कांफ्रेस में भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने बधाई दी ।

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Our company deals with "Managing Reputations." We develop and research on Online Communication systems to understand and support clients, as well as try to influence their opinion and behavior. We own, several websites, which includes: Travel Portals: Jaipur.org, Pinkcity.com, RajasthanPlus.com and much more Oline Visitor's Tracking and Communication System: Chatwoo.com Hosting Review and Recommender Systems: SiteGeek.com Technology Magazines: Ananova.com Hosting Services: Cpwebhosting.com We offer our services, to businesses and voluntary organizations. Our core skills are in developing and maintaining goodwill and understanding between an organization and its public. We also conduct research to find out the concerns and expectations of an organization's stakeholders. Our role is varied and will depend on the organization and sector.

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