ग्लोबल फ्यूजन कांसर्ट ‘जोग जैज़’ की प्रस्तुति से अभिभूत हुए श्रोता

जयपुर। जवाहर कला केन्द्र के रंगायन में ‘विविधा’ के दूसरे दिन शनिवार को आयोजित ग्लोबल फ्यूजन कांसर्ट ‘जोग जैज़’ की प्रस्तुति से उपस्थित सभी संगीतप्रेमी अभिभूत हो गये। सभी ने तालियों के साथ कलाकारों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान तंत्री सम्राट पं. सलिल भट्ट ने सात्विक वीणा पर अपनी शानदार प्रस्तुति से जादू जगाया तो जर्मन फनकार मैथिऑस मूलर ने नए डिजाइन किए गिटार साज पर सुरों का सम्मोहन बिखेर श्रोताओं के दिलों को छू लिया। देश-दुनिया में प्रसिद्ध दोनों फनकारों ने अपने-अपने साजों पर बसंत मुखारी, किरवानी, भूपाली, पहाड़ी जैसी शास्त्रीय रागों पर आधारित मशहूर रचनाओं की अनूठी प्रस्तुति देकर जेकेके की आबोहवा में फ्यूजन म्यूजिक का सुरूर घोल दिया। इनके सुरों की बेहतरी अदाइगी ने सभी संगीतप्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने 8 बीट और 6 बीट में राग जोग का नैसर्गिक सौन्दर्य छलकाकर सुरों के खूबसूरत लगाव और ठहराव से अपने फन का खूबसूरत नजारा पेश किया। दोनों फनकारों की अपने-अपने साजों पर सुरों की टाइमिंग इतनी परफैक्ट थी कि प्रत्येक श्रोता सुरमयी संगीत से सराबोर होता चला गया।

कार्यक्रम में चार चांद लगाते हुए तबले और परकशन पर पं. प्रांशु चतुरलाल ने भी अपने दमदार वादन से श्रोताओं में संगीत का रोमांच जगाया। इन्होंने तबले और ड्रम की साउंड जैसे स्पेनिश साज काहून पर लय एवं ताल के रोचक संगम पेश कर श्रोताओं की खूब तालियां बंटोरी। काहून ऐसा साज है जिस पर कलाकार को बैठकर बजाना होता है। अपने तरह के इस अनोखी परकशन प्रस्तुति में पं. प्रांशु चतुरलाल अपने फन की छाप छोड़ी।

रविवार को ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ प्रस्तुति में होगा स्क्रीन और स्टेज पर परफोरमेंस का कोलाज
तीन दिवसीय उत्सव ‘विविधा’ के तहत में थिएटर, संगीत और सिने स्टोरी के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में अंतिम दिन रविवार 3 नवम्बर को शाम 6:30 बजे मध्यवर्ती में ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ प्रस्तुति में स्क्रीन और स्टेज पर परफोरमेंस का कोलाज पेश किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि देश-विदेश में ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ प्रस्तुति के 2000 से अधिक शो हो चुके हैं। इस प्रस्तुति में भारत में फिल्मों निर्माण प्रक्रिया के आरम्भ से लेकर रंगीन फिल्मों के निर्माण तक की दास्तां रोचक ढंग से पेश की जायेगी। प्रस्तुति के दौरान उस दौर के प्रसिद्ध मुख्य-मुख्य गानों को मंच पर उसी परिवेश और वेशभूषा में अभिनीत भी किया जायेगा जो इसका विशेष आकर्षण साबित होगा।

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