जनता के साथ धोखा है रेल बजट- भाजपा

रेल मंत्री केञ् रेल बजट को प्रदेश भाजपा ने निराशाजनक करार दिया है। प्रदेश प्रवタता सुनील भार्गव ने कहा कि यात्री किराए में बढ़ोतरी करना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। अब यह तय हो गया है कि क्म् मार्च को आने वाला आम बजट भी पिलक की उमीदों पर खरा नहीं उतरेगा। भाजपा एसटीएससी मोर्चे केञ् अध्यक्ष सतीश चंदेल ने इस बजट को महंगाई बढ़ाने वाला बजट करार दिया। उन्होंने कहा कि ख्क्लिंृक्क् में क्ब् ट्रेनें घोषित की थी, लेकिन क्ही चालू हुई वहीं पिछले रेल बजट में घोषित क्स्त्र नई ट्रेनों में से बस आठ ही चालू हो पाईं। ऐसे में इस बार बीस नई ट्रेनों की घोषणा कोरा दिखावा है। उन्होंने कहा कि आठ स्टेशनों को आदर्श स्टेशन बनाने का काम तो अब तक शुरू नहीं हुआ।

राजस्थान को मिली 20 बीस नई ट्रेनें

इस बार के् रेल बजट में राजस्थान को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूञ्प से बीस ट्रनों का तोहफा मिला है। इन नई ट्रेनों में 15 एタसप्रेस और 5 पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं। इनमें कोयाबटूर बीकानेर साप्ताहिक, अहमदाबाद अजमेर डेली, अजमेर हरियाणा सप्ताह में तीन दिन, बीकानेरलृपुरी साप्ताहिक, फिरोजपुर गंगानगर दैनिक, जयपुरलृसिकंञ्दराबाद साप्ताहिक, ओखा जयपुर साप्ताहिक, बलसाड़लृजोधपुर साप्ताहिक, बीकानेरलृबांद्रा साप्ताहिक, अहमदाबाद गोरखपुर साप्ताहिक, बांद्रा टर्मिनल से दिल्ली साप्ताहिक, कोटा हनुमानगढ़ साप्ताहिक, शामिल हैं। पैसेंजर ट्रेनों में जोधपुर बिलाड़ा डेली, ड्डुञ्लेरा रेवाड़ी डेली, अजमेरलृपुष्कर सप्ताह में पांच दिन, कोटा से झालावाड़ डेली ट्रेनें प्रमुख हैं।

दिनेश की रेल, पटरी पर फेल

यात्री किराए में बढोतरी की घोषणा से अपने पहले ही बजट में दिनेश त्रिवेदी की रेल पटरी से उतरती नजर आ रही है। खुद उनकी पार्टी की ममता बनर्जी उन पर यात्री कराए का इजाफा वापस लेने का दबाव बना रही हैं। रेलमंत्री ने आसपास केञ् कस्बों और शहरों से ट्रेन केञ् जरिए जयपुर आकर काम करने वालों पर दो पैसे प्रति किलोमीटर का भार बढ़ाया ,जबकि एタसप्रेस ट्रेन में तीन पैसे, स्लीपर में पांच पैसे,एसी थर्ड में दस,सकेंञ्ड एसी में क्भ् और फर्स्ट एसी में फ् पैसे प्रति किलोमीटर किराए में बढ़ोतरी की गई है। बात राजस्थान की करें तो रेल मंत्री ने प्रदेश को क्भ् एタसप्रेस और भ् पैसेंजर गाडिय़ों का तोहफा दिया है इनमें कोयबूटर बीकानेर साप्ताहिक, अहमदाबाद अजमेर डेली, अजमेर हरिजयपुर अजमेर और जोधपुर रूञ्ट को हाई स्पीड कॉरीडोर बनाने की घोषणा की गई। इस कॉरीडोर में हाई स्पीड ट्रेनें चलाई जाएंगी। जयपुर दिल्ली केञ् बीच डबल डेकर टे्रनें चलेंगी। भरतपुर में सुरक्षा सेंटर खोला जाएगा। राजस्थान केञ् लिए सबसे बड़ा तोहफा हाई स्पीड कॉरीडोर को ही कहा जाएगा। यह कॉरीडोर भविष्य में बुलेट ट्रेनों का रास्ता खोलेगा।

महंगे पेट्रोल के बाद भी चल निकली मोटरसाइकिल

जनता जनार्दन जिंदाबाद। मतदाता और उंट वास्‍तव में एक से हैं, जाने किस करवट बैठ जाएं। बसपा का हाथी और कांग्रेस का पंजा क्‍या मोटरसाइकिलवा के पहिया के नीचे यूं कुचले जाएंगे, भला कल्‍पना भी की थी किसी ने। पर हो गया। महंगाई से ञस्‍त जनता बिना पेट्रोल के भी मुलायम की मोटरबाइक पर ठप्‍पा लगा ही आई। सपा की इस जीत के असल हकदार अखिलेश माने जा रहे हैं। यंग ब्‍लड,  यंग एनर्जी। हाथी की तो चिंघाड साइलेंट मोड में आ ही गई है। पीठ थपथपाने वाली बात यह है कि राहुल गांधी ने हार का जिम्‍मा अपने सर लिया है। वरना कांग्रेस के बडबोले नेता तो ऐसे में डिप्‍लोमेटिक जवाब ही देते हैं। पब्लिक कहती है तो कहे कि महंगाई भ्रष्‍टाचार और दिग्‍विजय ने कांगेस की मिटटी की है पर युवराज राहुल को अब भी बधाई देनी ही होगी कि उन्‍होंने न सिर्फ ठीकरा अपने सर लेने की हिम्‍मत दिखाई बल्कि बहुत के लिए अखिलेश यादव को बधाई दी।petrol

गुलाबी नगरी के मेले त्‍यौहार

मेले त्‍यौहार

जयपुर मेले-त्‍यौहारों उत्‍सवों का शहर है। यहां परम्‍पराओं के मेले भी लगते हैं तो वहीं सभ्‍यताओं के परिचायक उत्‍सव भी होते हैं। इस शहर की सबसे बडी बात यह है कि यहां तीज गणगौर पर भीड उमडती है तो वहीं वैलेंटाइन डे और मदर्स फादर्स डे पर भी बडे आयोजन होते हैं, यह इस शहर की जिंदादिली का बडा प्रमाण है।

तीज—- तीज का मेला सावन के माह में आयोजित होता है। जुलाई अगस्‍त के महीने में सावन का महीने आता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार पार्वती ने भगवान शिव जैसा पति पाने के लिए वर्षों तपस्‍या की थी। तीज के दिन कन्‍याएं पार्वती को याद कर पूजन करती हैं और शिव जैसे पति की कामना करती हैं। तीज पर शाम को परकोटे में जनानी डयोढी से तीज की सवारी निकलती है। तीज का यह मेला देखने दूर दराज से लोग आते हैं। इसमें शाही लवाजमें के साथ तीज की सवारी निकलती है। इसके अलगे दिन बूढी तीज की सवारी निकलती है। प्राय यह परम्‍परा इसलिए शुरु हुई भीड में बच्‍चे और बुजुर्ग तीज की सवारी नहीं देख पाते थे, इसलिए अगले दिन तीज की सवारी निकाली जाने लगी।

गणगौर–चैत्र शुक्‍ला तृतीया को गणगौर मनाई जाती है। आधुनिक कलेंडर के हिसाब से यह मार्च के महीने में मनाई जाती है। गणगौर का भी जयपुर में मेला भरता है। मिठाई की दुकानों पर घेवर धडल्‍ले से बिकते हैं। यह मिष्‍ठान जयपुर की पहचान है। इस दिन नव सुहागनें विशेष पूजा करती हैं। गणौर के मेले में भी गणगौर की सवारी निकाली जाती है।

जयपुर के पास है चाकसू और चाकूस में है शील की डूंगरी। डूंगरी मतलब छोटी पहाडी। शीतलाष्‍टमी के दिन यहां मेला भरता है। होली के बाद मार्च अप्रेल में शीतला अष्‍टमी आती है। इस दिन बासा खाने का रिवाज है। घरों में तवा नहीं चढता। साइंटिि‍फक नजरिए से देखें तो सही ही है, यह चेतावनी भरा दिन है कि अब आज आखिरी बार बासा खाना खाएं, गर्मियां शुरु हो रही हैं, आज से बासा खाना बंद। 

संकरांत- मकर संक्रांति जयपुर में एक बडा उत्‍सव है। हर साल जनवरी की 14 तारीख को यह त्‍यौंहार मनाया जाता है। सूर्य के मक्‍कर राशी में प्रवेश पर दानपुण्‍य करने की मान्‍यता है। घरों में फीणी और तिल की मिठाइयां खाई जाती हैं। इस अवसर पर पतंग उडाने का गजब का क्रेज जयपुर में देखा जाता है। दिल्‍ली में 15 अगस्‍त और पंजाब में वसंत पंचमी पर पतंग उडती हैं। जयपुर में मकर संक्रांति के दिन पतंग उडाई जाती है।

विरासत उत्‍सव– जयपुर में जनवरी या कभी कभार मार्च के महीने में जयपुर विरासत फाउंडेशन की ओर से लोककलाकारों व अन्‍तरराष्‍ट्रीय कलाकारों के संगम वाला अनूठा आयोजन विरासत उत्‍सव होता आया है। यह विश्‍व मानचित्र में अपनी अगल पहचान बनाने लगा है।

 जयपुर साहित्‍य उत्‍सव- जयपुर शहर साहित्‍य जगत के लिए भी दुनियाभर में एक बडी बहचान बन गया है। यहां डिग्‍गी पैलेस में हर साल जनवरी में टीमवर्क गु्रप की ओर से इंटरनेशनल लिट्रेचर फेस्टिवल का आयोजन होता है। लगातार सात सालों से इस आयोजन ने जयपुर को एक नई पहचान दी है। हाल ही में 2012 का आयोजन वरिष्‍ठ साहित्‍यकार लेखक सलमान रुश्‍दी को लेकर विवादों में रहा। इस फेस्टिवल के आयोजक संजॉय के रॉय दिल्‍ली, मुम्‍बई सिंगापूर में इसी तरह के आयोजन कराते रहते हैं।

जयपुर दिवस समारोह– 18 नवम्‍बर को हर साल जयपुर दिवस समारोह मनाया जाता है। कोई दो दशक पहले जयपुर के कुछ समाज सेवियों ने इसका आयोजन शुरु किया। ि‍फर नगर निगम सालों तक यह आयोजन करने लगा। माली हालत खराब हुई तो कोई चार-पांच सालों तक यह आयोजन नहीं हुआ। इसके बाद राजस्‍थान सरकार की मदद से प्रमोद भसीन और अमित शर्मा की टीम ने यह आयोजन अपने हाथ में लिया।  वर्ष 2009 से इस आयोजन को उस वक्‍त एक नई पहचान मिली जब 24 घंटे नॉन स्‍टॉप जयपुर की ही विधाओं के जरिए जयपुर दिवस समारोह का रिकॉर्ड बनाया गया। यह फेस्टिवल भी अब जयपुर में पहचान बना रहा है।

कथा रंग- साहित्‍य जगत के एनुअल कलेंडर में अब कथा रंग का नाम शुमार है। जयपुर के व्‍यंगकार और नाटयकर्मी अशेक राही की संस्‍था पीएमटी की ओर से हर साल नवम्‍बर दिसम्‍बर माह में तीन दिन के फेस्टिवल कथारंग का आयोजन होता है। दुनिया के महान कहानीकारों की रचनाओं पर जयपुर के रंगकर्मी अभिनय करते नजर आते हैं। तीन दिन जयपुर में साहित्‍य की सांझ सजती है।

लोकरंग- जयपुर के जवाहर कलाकेन्‍द्र की ओर से हर साल देशभर के लोककलाकारों को मंच देने के लिए लोकरंग का आयोजन होता है। इसमें बारह तेहर प्रदेशों के कलाकार भागीदारी देते हैं। अक्‍टूबर में यह आयोजन जवाहर कला केन्‍द्र के ओपन थिएटर में होता है। जिसमें दर्शकों का सैलाब सा आ जाता है।

काइट फेस्टिवल- विदेशी सैलानियों के लिए यह भव्‍य आयोजन होता है। प्राय मकर संक्रांति यानी की 14 जनवरी के दिन ही यह आयोजन राजस्‍थान के पर्यटन विभाग की ओर होता है। इसमें बाबू भाई पतंग वाले अपनी नायाब पतंगे आसमान में उडाते हैं।  बाबू भाई पूरी दुनिया अपनी पतंगों के साथ घूम चुके हैं। पहले यह आयोजन परकोटे में स्थित चौगान स्‍टेडियम में होता था अब यह जलमहल की पाल पर होने लगा है।

एलीफेंट  फेस्टिवल– विदेशी पावणों को जयपुर में हाथी की सवारी बहुत भाती है। आप जब भी यहां आएं, आमेर में हाथी की सवारी का लुत्‍फ उठा सकते हैं। इस पसंदगी को पर्यटन विभाग एलिफेंट फेस्टिवल के जरिए और निखारता है।  जयपुर में मार्च के महीने में होली के दिन एलीफेंट फेस्टिवल होता है। जिसमें गजराज तरह तरह के करतब दिखाते हैं।

उत्तर प्रदेश: पांचवे चरण में दोपहर तक 38% मतदान

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के पाँचवे चरण में इटावा और झांसी समेत 13 जिलों की 49 सीटों पर मतदान चल रहा है. दोपहर एक बजे तक 38.76 % मतदान की खबर है.